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क्या होगा महागठबंधन का? नीतीश कुमार हर हाल में चाहते हैं तेजस्वी का इस्तीफा

अर्ली न्यूज़।पटना। होटल भूमि घोटाला मामले में हो रही CBI  जांच में बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू के पुत्र तेजस्वी यादव के नाम आने के बाद से महागठबंधन  सरकार में शामिल जदयू और राजद के बीच तकरार बढ़ गई है।  जदयू चाहता है कि जांच होने तक तेजस्वी अपने पद से इस्तीफा दे दें जबकि राजद इस्तीफा नहीं देने पर अड़ा हुआ है।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नितीश कुमार  हर हाल में तेजस्वी का इस्तीफा चाहते हैं।  उन्होंने इस मामले में गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस के अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से फोन पर बात की। वे चाहते हैं कि कांग्रेस तेजस्वी पर इस्तीफे का दबाव बनाए।  सूत्रों ने कहा, नीतीश फैसले से पहले कांग्रेस को भी मौका देना चाहते हैं।  नीतीश महागठबंधन टूटने की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेना चाहते हैं।  नीतीश कुमार फैसले लेने से पहले 4 या 5 दिन और इंतजार कर सकते हैं।  हालांकि तेजस्वी पर जदूय का 4 दिन का अल्टीमेटम खत्म हो गया है।  इसी मामले को लेकर सीएम नीतीश कुमार आज शाम 4 बजे पटना में जदयू विधायकों की आपात बैठक बुलाई है।  दूसरी ओर आज ही राजद और कांग्रेस विधायकों की भी बैठक होगी।
जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की।  उनकी यह मुलाकात बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बिहार में जदयू एवं लालू प्रसाद यादव नीत राजद के बीच बढ़ती दूरियों के बीच हुई है।

सूत्रों ने कहा कि सोनिया के आवास पर करीब 40 मिनट तक चली बैठक में राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के बारे में चर्चा हुई।  सूत्रों ने इन नेताओं के बीच हुए विचार विमर्श के मुद्दों के बारे में चुप्पी साधे रखी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि गठबंधन सरकार चलती रहे।

जदयू के प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं करेंगे।  यह पूछे जाने पर कि उनकी पार्टी इस मामले में राजद से क्या उम्मीद करती है, त्यागी ने कहा कि राजद नेता को आरोप के संदर्भ में विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए। उधर, लालू ने इन खबरों से इनकार किया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मामले में नीतीश कुमार के साथ मध्यस्थता को लेकर उनको फोन किया।  उन्होंने कहा, सोनिया गांधी और मेरे बीच इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई है. मैं इसे पूरी तरह खारिज करता हूं।  इससे पहले पटना में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख अशोक चौधरी ने नीतीश और लालू से मुलाकात की और कहा कि महागठबंधन मजबूत है. उधर, दिन में जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने लालू और तेजस्वी के परोक्ष संदर्भ में कहा कि जिनके खिलाफ आरोप लगे हैं, उन्हें ‘विपक्ष को चुप कराने के लिए’ अपनी संपत्ति के स्रोत बताने चाहिए।  उनके सहयोगी सुनील कुमार ने भी समान नजरिया पेश करते हुए स्पष्ट कहा कि पार्टी किसी भी सूरत में नीतीश कुमार की ‘स्वच्छ छवि’ से कोई समझौता नहीं करेगी।  उन्होंने कहा कि जदयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री ‘स़िद्धांतों की राजनीति और भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने के लिए’ जाने जाते हैं।

नीतीश कुमार और लालू यादव दोनों के दोस्त कहे जाने वाले सिन्हा से महागठबंधन के बीच में दरार पैदा कर रहे इस मामले के बारे मे पूछा गया तो उन्होंने कहा, दोस्ती निजी है लेकिन इस मामले (तेजस्वी यादव) में मैं न तो इस्तीफा मांगने का समर्थन कर रहा हूं, न ही इसका विरोध कर रहा हूं। बिहारी बाबू के नाम से लोकप्रिय सिन्हा ने अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा, मैं इस राजनीतिक मामले पर विशेषज्ञ नहीं हूं और इस मामले को हल करने का काम उनका (नीतीश और लालू) का है।  उन्होंने कहा, वो लोग काफी परिपक्व हैं और खुद से ही इस मामले का हल निकालेंगे. पटना साहिब से भाजपा सांसद ने कहा, मैं आशा और प्रार्थना करता हूं कि बिहार मध्यावधि चुनाव में न जाए. सिन्हा ने यह भी कहा, ‘विभि‍न्न पार्टियों में ऐसे लोग हैं जो तब भी मंत्री बने हुए हैं जब उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर किया जा चुका है या उनका मामला अदालत में अलग-अलग चरणों में है।  राजद अन्य लोगों के साथ ही केंद्रीय मंत्री उमा भारती का उदाहरण देता रहा है जिन पर अयोध्या में विवादास्पद ढांचा गिराने के मामले में आरोपपत्र दायर है लेकिन वह मंत्रालय में बनी हुई हैं।  हालांकि नेता ने किसी भी मंत्री का नाम नहीं लिया और तेजस्वी यादव का नाम लेने से भी परहेज किया।

बिहार में गठबंधन सरकार के सदस्यों में दरार बढ़ने के बीच, जदयू ने राजद पर दबाव बढ़ाते हुए उससे कहा कि 80 ​विधायक होने का घमंड दिखाने के बजाय वह उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर आरोपों को लेकर खुद को पाक-साफ साबित करे।  प्रदेश जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा, ’80 विधायकों का घमंड दिखाने वाली राजद को यह नहीं भूलना चा​हिए कि वह 2010 के प्रदेश चुनावों में 22 विधायकों पर आ गई थी और 2015 के चुनावों में गठबंधन प्रमुख के रूप में नीतीश कुमार के विश्वसनीय चेहरे के कारण इस संख्या में बढ़ोतरी हुई थी।  कुल 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में, राजद के 80, जदयू के 71, कांग्रेस के 27 एवं भाजपा के 53 विधायक हैं।  सिंह ने राजद की बिहार इकाई के प्रमुख राम चंद्र पूर्वे की 80 विधायकों वाली टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘सीमाओं में रहिए और जल्द से जल्द (तेजस्वी के खिलाफ) आरोपों पर स्पष्टीकरण दीजिए।  बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन में जदयू, राजद, कांग्रेस शामिल हैं।

About Anand Gopal Chaturvedi

Group Editor / CMD Early News Group

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