Saturday , September 22 2018 10:07 PM
Breaking News

हिमाचल में विधान सभा चुनाव का ऐलान 9 नवंबर को मतदान, 8 को आएगा परिणाम


हिमांचल।विधानसभा चुनाव का ऐलान हो गया है। राज्य में एक ही चरण में वोट डाले जाएंगे। यह चुनाव देश दो बड़ी पार्टियों कांग्रेस और बीजेपी के लिए बेहद खास है। लगभग पूरे देश में कमजोर हो चुकी कांग्रेस के सामने हिमाचल प्रदेश में सत्ता बचाने की चुनौती है तो बीजेपी के सामने अपने विजय अभियान को जारी रखने को मौका है। इस राज्य के पिछले चुनाव इतिहास पर नजर डालें तो यहां बीजेपी और कांग्रेस बारी-बारी से सत्ता का स्वाद चखती रही है। यानी इस राज्य में लंबे समय से दोनों में से कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में नहीं आ पाई है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि इस राज्य में जातिय समीकरण बड़ा ही दिलचस्प है। यहां राजपूत और ब्राह्मण जाति के सबसे ज्यादा वोटर हैं। ऐसे में दोनों राजनीतिक दलों ने शुरू से ही इन्हीं दोनों जातियों पर अपना फोकस कायम रखा है। राज्य में बीजेपी और कांग्रेस के स्टार नेताओं की लिस्ट पर भी नजर डालें तो यहां भी ब्राह्मण और राजपूत समाज के ही लोग नजर आते हैं।

दरअसल, हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा आबादी राजपूतों की है। यहां राजपूतों की आबादी 37.5 फीसदी है। वहीं दूसरे नंबर पर ब्राह्मण हैं. इनकी आबादी 18 फीसदी है। इन दोनों जातियों को जोड़ दें तो यह आकंड़ा 55 फीसदी पहुंच जाता है। ऐसे में राज्य की सत्ता में काबिज होने के लिए इन दोनों जातियों को साधना सबसे जरूरी है। राज्य की बाकी के 45 फीसदी आबादी पर नजर डालें तो दलित 26.5 फीसदी और अन्य जातियां 16.5 फीसदी हैं। ऐसे में राजपूतों और ब्राह्मणों के वोट फीसदी के सामने ये जातियां निर्णायक भूमिका नहीं के बराबर निभा पाते हैं।

जातीय समीकरण को देखते हुए बीजेपी इस बार के विधानसभा चुनाव में ब्राह्ममणों पर दांव लगाने की तैयारी में है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि बीजेपी केंद्रीय मंत्री जेपी जेपी नड्डा के चेहरे को आगे रख सकती है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके प्रेम कुमार धूमल ने राज्य की मेन स्ट्रीम राजनीति से लगभग खुद को अलग कर लिया है। वहीं उनके बेटे अनुराग ठाकुर उनके राजनीतक विरासत को संभाल रहे हैं। धूमल की राह में सबसे बड़ा रोड़ा उनकी बढ़ती उम्र बताई जा रही है।

73 वर्षीय के धूमल को कमान सौंप कर बीजेपी पीएम मोदी के जरिए 75 वर्ष के तय उम्र की सीमा की अवहेलना भी नहीं करना चाहेगी. बीजेपी को भरोसा है कि धूमल और उनके बेटे अनुराग ठाकुर के चेहरे पर अच्छी खासी संख्या में राजपूत वोट उन्हें मिल जाएंगे। ऐसे में अगर ब्राह्मणों का कुछ फीसदी वोट मिल जाए तो सत्ता पाना आसान हो जाएगा। इस फॉर्मूले में जेपी नड्डा सबसे अच्छे विकल्प हो सकते हैं. नड्डा अमित शाह करीबी होने के साथ संघ परिवार की भी पसंद माने जाते हैं।

वीरभद्र सिंह राजपूत बिरादरी से आते हैं। कांग्रेस एक बार फिर से वीरभद्र सिंह की अगुवाई में भाग्य आजमा रही है। इसके अलावा कांग्रेस आनंद शर्मा के चेहरे को आगे रखकर ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश कर सकती है। दोनों पार्टियां के प्लान पर नजर डालें तो इनका फोकस राजपूतों और ब्राह्मणों पर है। हालांकि 18 दिसंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद ही तय हो पाएगा कि आखिर बीजेपी या कांग्रेस में किसे राजपूत और ब्राहृमण समाज का समर्थन मिल पाया।

2003: बीजेपी को 16 सीटें और कांग्रेस को 43 सीटें।
2007: बीजेपी को 41 और 23 कांग्रेस सीटें।
2012: बीजेपी 26 और कांग्रेस 36 सीटें।

About Anand Gopal Chaturvedi

Group Editor / CMD Early News Group

Check Also

राम मंदिर निर्माण के लिए फिर आंदोलन प्रारम्भ होने का एलान

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एक बार फिर से आंदोलन प्रारम्भ हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

SR Global School