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12 साल तक के बच्चों से दुष्कर्म पर मिलेगी मौत की सजा, कानून में संशोधन की तैयारी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ दुष्कर्म पर फांसी की सजा को मंजूरी दी। शनिवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मोदी सरकार ने बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पॉक्‍सो एक्‍ट) में संशोधन कर आरोपी को फांसी की सजा पर मुहर लगाई थी। जिसके बाद संशोधित पाक्सो एक्ट को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था।

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पॉक्सो एक्ट में फांसी की सजा

कठुआ में पिछले दिनों हुई दुष्‍कर्म की घटना के बाद ऐसे आरोपियों को सख्‍त सजा देने की मांग की गई। कानून में बदलाव के बाद 12 साल तक बच्ची के साथ दुष्कर्म के दोषी को मौत की सजा होगी। पॉक्सो के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, दोषियों के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है और न्‍यूनतम सात साल की जेल है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आता है। इसके तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गयी। यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है।

12 साल तक के बच्चों से दुष्कर्म पर मिलेगी मौत की सजा, कानून में संशोधन की तैयारी
नए कानून में क्या होगा?

– नए कानून के मुताबिक, नाबालिगों से दुष्कर्म के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की व्यवस्था की जाएगी।

– फॉरेंसिक जांच के जरिए सबूतों को जुटाने की व्यवस्था को और मजबूत करने की व्यवस्था भी की जाएगी।

– दो महीने में ट्रायल पूरा करना होगा, अपील दायर होने पर 6 माह में निपटारा करना होगा

– नाबालिग के साथ दुष्कर्म के केस को कुल 10 महीने में खत्म करना होगा

अध्यादेश की 5 मुख्य बातें

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1. दुष्कर्म के मामलों में न्यूनतम सात साल के सश्रम कारावास को बढ़ाकर 10 वर्ष किया, अधिकतम इसे आजीवन भी किया जा सकेगा।

2. 16 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ दुष्कर्म के दोषियों को न्यूनतम 20 साल की सजा।

3. 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों को मृत्युदंड।

4. दो माह में पूरी करनी होगी दुष्कर्म कांड की जांच, दो माह में पूरा करना होगा ट्रायल।

5. 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म के आरोपी को नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत।

जांच और केस का निपटारा
– दुष्कर्म के सभी मामलों में जांच दो महीने में पूरी करना होगी।
– इन सभी मामलों में ट्रायल भी दो महीने में पूरी होगी।
– छह महीने में अपीलों का निपटारा होगा।
– 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के आरोपितों को अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी।
– इस मामले में जमानत की अर्जियों पर फैसला से पहले कोर्ट सरकारी वकील तथा पीड़िता के प्रतिनिधि को 15 दिन का नोटिस देगा।
– मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए राज्य तथा हाई कोर्ट की सलाह से नए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे।
– सरकारी वकील के नए पद सृजित होंगे तथा दुष्कर्म केसों के लिए सभी थानों व अस्पतालों को विशेष फॉरेंसिक किट दी जाएंगी।
– दुष्कर्म मामलों के लिए सभी राज्यों में एक्सक्लूसिव विशेष फॉरेंसिक लैब बनेंगे।
– ये सभी कदम तीन महीने के भीतर मिशन मोड प्रोजेक्ट के रूप में उठाए जाएंगे।

कानून बनने के लिए मानसून सत्र का करना होगा इंतजार

कठुआ, सूरत और उन्नाव में मासूम बेटियों के साथ दुष्कर्म की वीभत्स घटनाओं से देशभर में फैले आक्रोश के मद्देनजर सरकार ऐसे मामलों में पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने और दोषियों को कठोर दंड दिलाने के लिए एक अध्यादेश लेकर आई है। इसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2018’ को मंजूरी दे दी गई, जिसमें ये प्रावधान किए गए हैं। आज (शनिवार) को इस अध्यादेश को राष्ट्रपति से भी मंजूरी मिल गई है। अब अधिसूचना जारी होने के बाद कानून के तौर पर लागू हो जाएगा। लेकिन अब विधेयक लाकर उसे संसद से पारित कराने के लिए सरकार को जुलाई-अगस्त तक मानसून सत्र के लिए इंतजार करना पड़ता, इसलिए यह अध्यादेश लाया गया है। लेकिन अध्यादेश को संसद के अगले सत्र में विधेयक के रूप में पारित कराना आवश्यक होगा।

अध्यादेश में दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए भी व्यवस्था की गई है। दुष्कर्म के मामलों की जांच दो माह में पूरी करनी होगी, वहीं दो माह के भीतर इसका ट्रायल पूरा करना होगा। ऐसे मामलों में अपील के निपटारे के लिए छह माह की अवधि तय की गई है। इसका मतलब यह है कि अपराधियों को एक साल से भी कम समय में सजा हो जाएगी। विशेष बात यह है कि 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को अग्रिम जमानत भी नहीं मिलेगी। अदालत को ऐसे आरोपियों की जमानत पर फैसला करने से 15 दिन पहले लोक अभियोजक या पीड़िता के प्रतिनिधि को नोटिस देना होगा।

यौन अपराधियों का बनेगा डेटाबेस, भारत होगा नौवां देश

अध्यादेश में यौन अपराधियों को ट्रैक करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर उनका डेटाबेस और प्रोफाइल बनाने का भी प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय अपराध नियंत्रण ब्यूरो (एनसीआरबी) यह डेटाबेस रखेगा। यौन अपराधियों का डेटाबेस बनाने वाला भारत दुनियाभर में नौवां देश होगा। फिलहाल अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिडाड और टोबेगो में यौन अपराधियों का इस तरह का डेटाबेस रखा जाता है। अमेरिका में यह डेटाबेस सार्वजनिक होता है जबकि अन्य देशों में इसका इस्तेमाल सिर्फ कानून प्रवर्तनकारी एजेंसियां ही करती हैं।

निर्भया कांड के बाद हुआ था कानून में संशोधन

दिसंबर, 2012 में हुए निर्भया सामूहिक दुष्कर्म कांड के बाद आपराधिक कानून में संशोधन किया गया था, जिसके तहत दुष्कर्म के मामलों में पीड़िता की मौत या उसका जीवन ‘निष्क्रय’ हो जाने की स्थिति में दोषियों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान वाला अध्यादेश लाया गया था। बाद में यह आपराधिक कानून संशोधन एक्ट बना था।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की एक जनहित याचिका लंबित है जिसमें छोटे बच्चों के साथ दुष्कर्म पर चिंता जताते हुए कानून को कड़ा किये जाने की मांग की गई है। कोर्ट ने इस याचिका पर सरकार से जवाब मांगा था। सरकार की ओर से शुक्रवार को एडीशनल सालिसिटर जनरल के जरिये एक नोट पेश कर बताया गया कि सरकार पोक्‍सो कानून में संशोधन कर 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से दुष्कर्म के दोषी के लिए मृत्युदंड का प्रावधान करने पर विचार कर रही है।

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Group Editor / CMD Early News Group

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