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फसल की तैयारियों में जुटे कृषि विभाग ने किसानों को दी हिदायत

खरीफ की फसल की तैयारियों में जुटे कृषि विभाग ने किसानों को हिदायत दी है कि वे फर्जीवाड़े से बचने से लिए पहले ही अच्छी क्वालिटी के बीजों व उर्वरक का स्टॉक करके रख लें. ऐनवक्त पर अक्सर किसानों के साथ धोखा हो जाता है. किसानों की जरूरत को देखते हुए कई फर्जी कंपनियां घटिया क्वालिटी का बीज अच्छे पैक में बेच देती है. इसका खामियाजा बाद में किसानों का उठाना पड़ता है. इस बार कृषि विभाग विशेष रणनीति के तहत इसके लिये ‘कृषि समृद्धि रथ’ चलायेगा, जहां किसानों को अच्छी गुणवत्ता का बीज अनुदानित दर पर उपलब्ध होगा.
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कृषि विभाग की ओर से खरीफ की फसल के लिए तय किए बुवाई के लक्ष्यों के मुताबिक इस बार प्रदेश में 7 लाख 70 हजार क्विंटल बीज की जरूरत का अनुमान है. जबकि अभी सार्वजनिक और सहकारिता क्षेत्र के उपक्रमों के पास इससे भी 10 फीसदी ज्यादा यानि करीब 8 लाख 31 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध है. पिछले साल कुछ फसलों के बीज की कमी सामने आई थी जिसके चलते इस बार इन फसलों के बीज की समुचित व्यवस्था की गई है.

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को मानसून आने से पहले ही जरूरत के मुताबिक बीज खरीद कर रखना चाहिये ताकि वे बीज कम्पनियों के फर्जीवाड़े से बच पायें. बीज कम्पनियां कई बार फर्जीवाड़ा कर घटिया क्वालिटी का बीज अच्छे पैक में बेच देती है और कई बार मांगे गये बीज की अनुपलब्धता का बहाना बनाकर विक्रेता उन्हें दूसरी कम्पनी का घटिया बीज बेच देते हैं. अब कृषि विभाग विशेष रणनीति के तहत इसके लिये ‘न्याय आपके द्वार अभियान’ में ‘कृषि समृद्धि रथ’ चलायेगा, जहां किसानों को अच्छी गुणवत्ता का बीज अनुदानित दर पर उपलब्ध होगा.

वहीं खरीफ सीजन में 8 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 3 लाख मीट्रिक टन डीएपी की भी जरूरत होगी. अभी प्रदेश में करीब 3 लाख 10 हजार मीट्रिक टन यूरिया का भण्डारण है. वहीं प्रदेश को हर महीने भारत सरकार से एक से सवा लाख मीट्रिक टन यूरिया का आवंटन किया जा रहा है. कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 15 जुलाई से 15 अगस्त तक यूरिया की जरुरत पड़ेगी और तब तक प्रदेश में इसका पर्याप्त भण्डारण होगा. चूंकि अब किसानों को पॉस मशीन के जरिये उर्वरक का वितरण करने की व्यवस्था की गई है. लिहाजा कालाबाजारी की आशंकायें काफी हद तक खत्म हो गई है. फिर भी कृषि अधिकारी धोखाधड़ी जैसी स्थितियों से बचने के लिये किसानों को उर्वरकों का भी अग्रिम भण्डारण की सलाह दे रहा है.

परिस्थितियों के आगे बेबस किसानों को कई बार दोबारा बुवाई करने का या फसल परिवर्तन करने की जरूरत पड़ जाती है. ऐसी स्थिति में सरकार ने पड़ौसी राज्यों में बीज की उपलब्धता का भी आंकड़ा ले रखा है ताकि जरूरत पड़ने पर वहां से बीज का बंदोबस्त किया जा सके. वहीं बाजार में बीज उपचार आदि के उपयोग में ली जाने वाली दवाइयों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है.

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Group Editor / CMD Early News Group

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