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उप चुनाव में मिल रही शिकस्त के बाद पिछड़ी जातियों के साथ लामबंदी की कोशिश

उप चुनाव में लगातार मिल रही शिकस्त से चिंतित भाजपा ने सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश तेज कर दी है। नौकरियों में ओबीसी की भागीदारी का पता लगाने के लिए कमेटी गठित करने के प्रदेश सरकार का फैसला भाजपा की इसी कोशिश का हिस्सा नजर आता है।

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भले ही घोषित तौर पर इसका उद्देश्य सिर्फ पिछड़ी जातियों की नौकरियों में भागीदारी के तथ्यात्मक आंकड़े जुटाने तक सीमिति रखा गया हो। पर, इसके पीछे कहीं न कहीं लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अति पिछड़ी जातियों की भाजपा के साथ लामबंदी की कोशिश भी नजर आ रही है।

इस फैसले के तार 2001 में राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के समय अति पिछड़ों और अति दलितों को आरक्षण देने के लिए लागू की गई रिपोर्ट से जुड़े हुए भी दिखते हैं।

दरअसल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 3 अक्टूबर 2013 को एक मामले में फैसला देते हुए सरकारी नौकरियों में जातियों की हिस्सेदारी पर सवाल उठाया था। न्यायालय ने कहा था कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण की श्रेणी में आने वाली जातियों में कुछ का ही वर्चस्व है। कुछ जातियों का प्रतिनिधित्व बिल्कुल नहीं है।

माना जा रहा है कि मौजूदा सरकार ने उसी फैसले पर अमल की राह पर चलते हुए ओबीसी की भागीदारी का पता लगाने के लिए कमेटी के गठन का फैसला किया है। मोस्ट बैकवर्ड क्लासेज के संरक्षक डॉ. रामसुमिरन विश्वकर्मा भी कहते हैं कि फैसले के पीछे वर्तमान सरकार की अति पिछड़ी जातियों को अपने साथ जोड़ने की मंशा है।

पर, सिर्फ भागीदारी का पता लगाने भर से काम नहीं चलेगा बल्कि अति पिछड़ी जातियों को आरक्षण का लाभ दिलाने की दिशा में भी कदम उठाने होंगे। अगर यह काम सिर्फ चुनावी लाभ या हानि के लिहाज से हुआ तो इसका वास्तविक फायदा किसी को नहीं मिलेगा। न भाजपा को और अति पिछड़ी जातियों को।
यह है वजह
सूत्रों का कहना है कि चूंकि राजनाथ सिंह की सरकार के समय बनाए गए पिछड़ों में अति पिछड़ों को आरक्षण के फार्मूले पर न्यायालय में याचिका हो गई। संयोग से उसके बाद अभी तक प्रदेश में भाजपा की सरकार ही नहीं बनी।

अब जाकर भाजपा की सरकार बनी। पर, इन 14 वर्षों में आंकड़ों में फर्क आ गया है। इसीलिए सरकार ने ताजा आंकड़े जुटाने का फैसला किया है। आंकड़े सामने आने के बाद सरकार उस आधार पर अति पिछड़ों के आरक्षण पर आगे बढ़ेगी।

भाजपा के प्रदेश मंत्री अमरपाल मौर्य कहते हैं कि हमारी पार्टी जनसंघ के समय से ही सामाजिक समरसता पर काम करती रही है। सरकार की इस कमेटी का उद्देश्य भी सामाजिक समरसता और सामाजिक न्याय करना है ताकि आरक्षण का लाभ सभी को मिल सके। हमारी सरकार किसी का हक छीनने के पक्ष में नहीं है। पर, उन्हें देना जरूर चाहती है जिन्हें अभी तक उनका हिस्सा नहीं मिला है।
इतना भर पर्याप्त नहीं

मोस्ट बैकवर्ड क्लासेज के अध्यक्ष शिवलाल साहू का कहना है कि मंडल कमीशन में एल. आर. नायक की संस्तुतियों को लागू किए बिना सामाजिक न्याय पूरा नहीं हो सकता। दुर्भाग्य से किसी सरकार ने अभी तक ईमानदारी से इसे लागू करने में रुचि नहीं ली।

इसी कारण, आरक्षण का लाभ कुछ जातियों तक सिमटकर रह गया। साहू के अनुसार, नायक ने पिछड़ों को मिलने वाले 27 प्रतिशत आरक्षण में 12 प्रतिशत आरक्षण खेतिहर जातियों मसलन यादव, कुर्मी, गूजर और जाट तथा 15 प्रतिशत परंपरागत पेशेवर जातियों उदाहरण के लिए लोहार, नाई, कहा, मल्लाह, बढ़ई, पाल, निषाद, मुराई जैसो को मिलना चाहिए। साहू कहते हैं कि जब तक अति पिछड़ी जातियों को कोई लाभ नहीं होगा।

About Anand Gopal Chaturvedi

Group Editor / CMD Early News Group

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