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CBI के स्पेशल डायरेक्टर को 2 करोड़ देने में देरी हुई तो जारी किया लुक आउट नोटिस

मुझे  मेरे परिवार को झूठे केस में टॉर्चर न किया जाए, इसके लिए मैंने राष्ट्र की सर्वश्रेष्ठ जांच एजेंसी CBI के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को उनके आदमियों के हाथ कथित तौर पर 2.95 करोड़ रुपए पहुंचा दिए थे. कुल पांच करोड़ की बात हुई थी. बाकी बची राशि का जुगाड़ करने में थोड़ी देरी हो गई तो उन्होंने मेरे विरूद्ध लुक आउट नोटिस जारी करा दिया. मैं अपने बेटे का दाखिला कराने के लिए परिवार के साथ फ्रांस जा रहा था, लेकिन मुझे हैदराबाद एयरपोर्ट पर रोक लिया गया.
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मैंने किसी तरह उन्हें बीते दस अक्तूबर को बाकी राशि देने का भरोसा दिलाया. कुछ दे भी दिए. फिर उन्होंने दबाव बनाया तो मैंने CBI निदेशक को लिखित शिकायत दे दी. सीबीआई के भीतर भ्रष्टाचार का कितना बड़ा खेल चलता है, तेलंगाना वासी सतीश बाबू सना ने अपनी शिकायत में उक्त खुलासा किया है. उनकी शिकायत पर ही CBI ने स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना, डीएसपी देवेंद्र कुमार, सोमेश प्रसाद, मनोज प्रसाद  अन्य कुछ अज्ञात लोगों के विरूद्ध करप्शन की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया है.

नोटिस  उगाही, दोनों खेल एक साथ चलते रहे, जानिए कैसे 

सतीश बाबू सना के मुताबिक, CBI के डीएसपी देवेन्द्र कुमार ने 9 अक्टूबर 2017 को मुझे पहला नोटिस भेजा. इसमें लिखा था कि मोईन अख्तर कुरैशी मामले में पूछताछ के लिए उसे 12 अक्टूबर को CBI मुख्यालय आना है. मैं चला गया. कुरैशी के साथ क्या संबंध है, ऐसे कुछ सवाल पूछे. मुझे ऑडियो भी सुनाया गया. मैंने अपना बयान दर्ज करा दिया  शाम को घर चला गया. उन्हें बता दिया था कि मैं एक निवेशक हूं, मैने कोई गलत कार्य नहीं किया.

आठ दिन बाद यानी 17 अक्तूबर को फिर डीएसपी ने नोटिस भेज दिया. मैं 23 अक्तूबर को पेश हुआ तो फिर वही पहले वाले सवाल. मैंने बता दिया कि कुरैशी की ग्रेट हाइट इंफ्रा कंपनी में 50 लाख रुपए निवेश किए थे. इनकम टैक्स विभाग में भी यह सब जानकारी है. 1 नवम्बर 2017 को फिर बुला लिया. वही सवाल  वही जवाब चलते रहे. हां, इस बार वहां पर सुकेश गुप्ता, शब्बीर अली  कुरैशी भी मौजूद थे. जांच ऑफिसर देवेंद्र कुमार कहा कि मैंने वेनपिक केस के पचास लाख दिए हैं. मैंने इस बात से इंकार कर दिया  लिखित में बोला कि मेरा इस केस से कोई लेना-देना नहीं है. फिर भी नोटिस आते रहे.

5 करोड़ दे दो, नोटिस नहीं आएगा

बतौर सतीश बाबू, दिसंबर में मैं दुबई चला गया. वहां मनोज प्रसाद नाम के आदमी से मिला. उसने सोमेश से मिलवाया. सोमेश ने CBI के अधिकारी से फोन पर बात करा दी. मुझसे कहा, पांच करोड़ दे दो, नोटिस नहीं आएगा. 3 करोड़ एडवांस देने होंगे  बाकी चार्जशीट फाइल करते समय दे देना. पक्का क्लीन चिट मिल जाएगी.

सोमेश ने अपने मोबाइल के वाटसेप की डीपी की फोटो दिखाई. उसने बताया, ये राकेश अस्थाना हैं. फोटो वर्दी में थी. मैंने गूगल पर चेक किया तो वह फोटो स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की थी. यह सोचकर कि ये लोग परिवार को भी परेशान करेंगे, मैंने सोमेश को एक करोड़ दे दिए. दिल्ली प्रेस क्लब की पार्किंग में भी पेमेंट की गई. सोमेश ने एक फोन भी सुनवाया, जिसमें CBI का आला अधिकारी अपने मातहत ऑफिसर को यह मामला निपटाने का आदेश दे रहा है.

About Anand Gopal Chaturvedi

Group Editor / CMD Early News Group

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