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हत्या से एक दिन पहले ही इन्दिरा ने कहा कि, जब मैं मरूंगी तो मेरे खून का हर एक कतरा भारत को मजबूत करने में लगेगा

अर्ली न्यूज़/दिल्ली। मानो इंदिरा गांधी को अपनी मौत अहसास हो चूका था,अपनी हत्या से एक दिन पहले यानी 30 अक्टूबर को वह एक चुनावी सभा को संबोधित करने गई थी। 30 अक्टूबर 1984 के दिन इंदिरा गांधी को उड़ीसा में एक बड़ी सभा को संबोधित करना था। हमेशा की तरह उनका भाषण उनकी सूचना सलाहकार एचवाई शारदा प्रसाद ने तैयार किया था, लेकिन इंदिरा जब मंच पर जनता को संबोधित करने पहुंचीं तो उस वक्त उन्होंने शारदा प्रसाद की लिखी स्क्रिप्ट को भूल कर अपना भावनात्मक भाषण जनता के सामने रख दिया। उन्होंने कहा ” मैं आज हूं और हो सकता है कल यहां न रहूं, लेकिन जब मैं मरूंगी तो मेरे खून का हर एक कतरा भारत को मजबूत करने में लगेगा। “इंदिरा गांधी की कही बात से सब आश्चर्यचकित थे। लेकिन इंदिरा ने जो कहा वही नियति ने सच कर दिया और उनको हिंसात्मक तरीके से मार दिया गया। भाषण के बाद इंदिरा वापिस दिल्ली आईं, उस रात इंदिरा को नींद नहीं आ रही थी। मानो उन्हें अनहोनी की भनक लग गई हो।
जब इंदिरा गाँधी ने ऑपरेशन ब्लूस्टार चलाया था तो ख़ुफ़िया एजेंसियों ने आशंका प्रकट की थी कि इंदिरा गांधी पर हमला हो सकता है, उनकी सुरक्षा से सभी सिख गार्ड्स को हटाया जाए लेकिन जब ये फ़ाइल इंदिरा के पास पहुंची तो उन्होंने उस पर लिखा,”आरंट वी सेकुलर? (क्या हम धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं?. इंदिरा को मालूम भी नहीं था कि उनका यह फैसला एक दिन उनकी जान ले लेगा । हुआ भी वही जो नियति मंजूर था,31 अक्टूबर 1984 उन्ही के सुरक्षा कर्मियों ने गोली से भून डाला।

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Group Editor / CMD Early News Group

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