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1984 कानपुर सिख नरसंहार मामला सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद न्याय की उम्मीद बढ़ी

लखनऊ। अखिल भारतीय दंगापीड़ित राहत कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, स.कुलदीप सिंह भोगल ने प्रेस को दिये एक बयान में कहा कि कानपुर सिख नरसंहार के मामले में दाखिल जनहित याचिका माननीय सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के लिये लगी थी। मामला दो जजों की बेंच जिसमें जस्टिस मदन वी. लोकुर एवं जस्टिस दीपक गुप्ता थे। यह मामला माननीय न्यायालय ने दिल्ली सिख नरसंहार मामले के साथ सुना जा रहा था। आज माननीय न्यायालय ने इस मामले को त्वरित एवं स्वतंत्र सुनवाई के लिये दिल्ली वाले 1984 के नरसंहार वाले मामले से अलग कर दिया। इस आदेश के बाद अब कानपुर सिख नरसंहार जिसमें 127 लोग मारे गये थे, जिसमें करोड़ों की सम्पत्ति नष्ट की गयी थी और आर.टी.आई. खुलासे से 32 गुनाहगारों के नाम सामने आये थे। इस मामले में अब जल्द फैसले की उम्मीद बहुत बढ़ गई है। अब चूंकि केन्द्र सरकार ने सिट ;ैप्ज्द्ध गठन की स्वीकृति दे दी है। उत्तर प्रदेश सरकार के जवाब आते ही सिट ;ैप्ज्द्ध गठन का मार्ग प्रशस्त हो जायेगा। इस मामले में याचिकाकर्ता कुलदीप सिंह भोगल एवं दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से अधिवक्ता प्रसून कुमार एवं वी.के. सिद्धार्थन पेश हुए थे। उन्होंने कहा कि इस मौके पर जसविन्दर सिंह जौली, इन्दरजीत सिंह भण्डारी, बीबी तरविन्दर कौर, बीबी अमरजीत कौर, हरजीत सिंह लाम्बा और अन्य दंगापीड़ित सदस्य मौजूद थे।

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Group Editor / CMD Early News Group

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