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जीने की चाह,सकारात्मक सोच एवं आत्मविश्वास ही कोरोना मरीजों की ताकत

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क-
गोंदिया – कोविड-19 महामारी ने पूरे विश्व में एक भय का वातावरण निर्माण कर दिया है। आज अगर हम वैश्विक रूप से देखें तो मानवीय जीवन में खुशियां गायब हुई है और एक भय का वातावरण निर्माण हो गया है। हालांकि कुछ ही देश हैं जो कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त करने की ओर अग्रसर हैं और वहां जश्न मनाने के समारोह हम टीवी चैनलों के माध्यम से देख रहे हैं। अमेरिका ने भी 12 से 15 वर्ष की आयु वालों को टीकाकरण की अनुमति जारी कर दी है। भारत ने भी बायोटेक को कोवैक्सीन 2 से 18 वर्ष के बच्चों पर ट्रायल की अनुमति दे दी है। और बुधवार दिनांक 12 मई 2021को इंटरनेशनल नर्सिंग डे हैं और विश्व की सभी नर्सेस को सकारात्मक प्रोत्साहन देना लाज़मी भी हैं।….. बात अगर हम कोरोना महामारी से लड़ाई की करें तो चिकित्सीय तकनीकी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हर देश कोविड-19 से जंग लड़ रहा है और कामयाबी की ओर बढ़ भी रहे हैं। परंतु इस लड़ाई को मजबूत करने के लिए हमें मरीजों, कोविड योद्धाओं को सकारात्मक प्रोत्साहन हौसला अफजाई, तारीफ, जैसे मूल मंत्रों से इस जंग को जल्द जीत सकते हैं क्योंकि अनेक केसों में इन मूलमंत्रों की कमी की वजह से मृत्यु, हताशा और हतोत्साहितना बढ़ रही है जिस को काबू में लाने के लिए यह प्रयोग दशकों से कारगर सिद्ध रहा है। जिससे इसे अपनाया जा रहा है और जरूरी भी है।.. बात अगर हम भारत की करेंतो भारत की मिट्टी में ही संयम  धैर्य, सांत्वना, सकारात्मक प्रोत्साहन, हौसला अफजाई, तारीफ़, संवेदनशीलता, इत्यादि मूलमंत्र समाए हुए हैं और यह मूलमंत्र भारत में जन्म लिए करीब-करीब हर व्यक्ति में है। हालांकि कुछ इसके अपवाद भी हैं पर अधिकतम नागरिकों में यह मूल मंत्र है।…बात अगर हम इन मूलमंत्रों की करें तो सफलता और सुख की घड़ी में तो यह मूल मंत्र प्रेरक हैं ही परंतु, आज हमें इस विपत्ति की घड़ी में मूलमंत्रों की कोविड-19 महामारी से महायुद्ध में इन मूल मंत्रों की अत्यंत तात्कालिक प्रयोग करने की आवश्यकता है। और हम कर भी रहे हैं क्योंकि बहुत से केसेस में यह देखने को मिल रहा है कि कोविड -19 मरीज घबराहट से ग्रस्त हो अधिक तबीयत खराब कर रहे हैं या काल के गाल में समा रहे हैं। चिकित्सीय क्षेत्रों की ब्रीफिंग और व्यक्तिगत रूप से भी कई बार इन मूलमंत्रों को स्वास्थ्यता प्राप्त करने के कारगर हथियार के रूप में माना गया है क्योंकि दवाई के साथ-साथ यह मूलमंत्र भी एक रामबाण का कार्य करते हैं और सकारात्मक माहौल, हौसला अफजाई, मरीज के ठीक होने और कोरोना योद्धाओं को फुर्ती से जंग लड़ने में अहम रोल अदा करते हैं। इसका उदाहरण हमने कुछ दिनों में अनेक बार देखें वह सुने हैं। मंगलवार दिनांक 11 मई 2021को ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण को काबू में करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने यूपी सरकार की बहुत तारीफ़ की जो मूलमंत्रों में से एक हैं डब्ल्यूएचओ ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से एक के बाद एक कई ट्वीट्स किए जिसमें संक्रमितों का पता लगाने टीम गठित कर गांवों में घर घर जाकर टेस्टिंग कर संक्रमितों और संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उन्हें आइसोलेशन कर संक्रमण को काबू में करने में मदद मिलेगी ऐसा प्रोत्साहन कर सरकार की तारीफ की। मंगलवार दिनांक 11 मई 2021 को ही नेशनल टेक्नोलॉजी दिवस पर माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने वैज्ञानिकों की प्रशंसा करते हुए कोरोना के खिलाफ जंग में उनके सहयोग के लिए शुक्रिया अदा करते हुए 1998 के पोखरण परीक्षण को भी याद किया और यहां भी इस मूलमंत्र का उपयोग हुआ। कुछ दिन पूर्व माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी कोविड-19 में से निपटने के लिए मुंबई मॉडल की तारीफ कर इससे प्रेरणा लेने की बात एक सुनवाई के दौरान कही थी और सभी का ध्यान इस मुंबई मॉडल की ओर गया और इसके बारे में विस्तृत जानकारी की चाहना सभ में आई यह भी इस मूलमंत्र में से एक है इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में गाजियाबाद यूपी की एक 84 वर्षीय महिला का बयान आया जिसने कोविड-19 को हराने के लिए इच्छाशक्ति और हौसले को मूल मंत्र के रूप में उपयोग किया और 10 दिनों में योग से कोरोना को मात दी जो काबिले तारीफ है।  मेरा यह प्रत्यक्ष अनुभव और देखी घटना हमारे गोंदिया जैसे छोटे जिले में हमारी कॉलोनी के 3 पड़ोसी जो पॉजिटिव थे लेकिन अभी एक सप्ताह पूर्व मात्र घबराहट और नेगेटिव सोच के कारण उनकी मृत्यु हो गई ऐसा उनके परिवार वालों ने बताया।  अंत में हम यही कहेंगे कि :-
हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते हैं।
हर तकलीफ में ताकत की दवा होते हैं।।
मंजिल उन्हीं को मिलती है ।
जिनके सपनों में जान होती है।।
पंख से कुछ नहीं होता।
हौसलों से उड़ान होती है।।
-संकलनकर्ता लेखक कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
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