Breaking
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 8वीं बार जीता एशिया कप, मोहसिन नकवी के हाथ से ट्रॉफी लेने से किया इनकारकुत्ते और बिल्लियों में एच5 बर्ड फ्लू के संक्रमण का खतरा, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाहब्रिक्स समिट का समापन, दुनिया में बढ़ रहा तनाव, एक क्षेत्र तक संकट सीमित नहीं: PM मोदीModi-Jinping की मुलाकात, LAC से चीन ने घटाई सेनानीम करोली बाबा पर फिल्म हनुमान अंश ने कमाए 250 करोड़CM गुप्ता का ऐलान, बख्शे नहीं जाएंगे भ्रष्टाचारी चलेगा बुलडोजरमस्जिद के मलबे के नीचे 15 फीट गहरा कुआं, कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंपसत्य निकेतन हादसे में हुई 7 मौतों में से 5 छात्र जबकि एक 75 वर्षीय मजदूरदिल्ली सत्य निकेतन हादसे में 7 लोगों की मौत,5 घायलों का इलाज जारीदिल्ली सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग हादसे में अभी तक 5 लोगों का रेस्क्यू किया गया
Breaking NewsMain slideबिहारराजनीतिराज्य

बिहार में नितीश के बाद अब ‘सम्राट युग’ की शुरुआत, क्या-क्या रहेंगी चुनौतियां

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क। राजनीति। 

पटना: बिहार में सामाजिक उद्धार का चेहरा बने और जेपी के पद चिन्हों पर चलने वाले नीतीश कुमार का दो दशक का राजनीतिक युग आखिरकार समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद कैबिनेट को भंग कर दिया है। सुशासन बाबू की छवी से विदा हुए नीतीश के बाद अब सम्राट युग की शुरुआत होने जा रही है। बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना ।एनडीए के विधायक दल ने उन्हें अपना नेता चुन लिया है। ऐसे में उनके सामने क्या चुनौतियां रहेंगी जानते हैं।

सम्राट चौधरी जैसे ही प्रदेश के मुखिया के तौर पर शपथ लेंगे, उनके सामने राज्य में फैला भ्रष्टाचार, अफसरशाही, गिरती शिक्षा व्यवस्ता, बेरोजगारी और कमजोर बुनियादी ढांचे जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी।सबसे बड़ी बात जो उनके सामने चुनौती बनकर खड़ी रहेगी, वो कानून व्यवस्था को बनाए रखना होगा।साथ ही विकास की रफ्तार को भी बढ़ाना होगा।

बिहार में भ्रष्टाचार और अफसरशाही इतनी मजबूती से जड़ बन चुकी है, कि पूरा राज्य रेड टेप की गिरफ्त में हैं. इस वजह से राज्य में केंद्र से जारी योजनाओं का सीधा लाभ भी लोगों तक नहीं पहुंच रहा है. बेरोजगारी और पलायन राज्य का एक मुख्य मुद्दा रहा है. इस बार के चुनाव में भी इसी मुद्दे ने सियासी जोर पकड़ा था. इसके अलावा पेपर लीक से लेकर महिला सुरक्षा भी राज्य में मुख्य रूप से एक मुद्दा है. पलायन करती युवा पीढ़ी को भी साधने के लिए एनडीए के नए मुख्यमंत्री होने जा रहे सम्राट चौधरी के सामने चुनौती है.

राज्य में अगर शिक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली की बात की जाए तो यहां उच्च शिक्षा का स्तर बेहद ही निम्न है।यहां स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं से जनमानस आए दिन जूझता रहता है।इसके अलावा राज्य में फैला संगठित और राजनीतिक रूप से मिला गैरकानूनी कामों को संरक्षण भी राज्य सरकार के लिए एक चुनौती है।इसके अलावा राज्य के बुनियादी ढांचे जैसे कृषि के क्षेत्र और सिंचाई के साधनों में कमी भी बिहार को पीछे धकेलने में अपनी नकारात्मक भूमिका निभाते रहे हैं।

नीतीश कुमार के पद से हटने के बाद अब बिहार में एक चर्चा भी जोरों पर है।शराबबंदी का फैसला करने के बाद नीतीश कुमार ने देश की राजनीति को एक बड़ा संदेश दिया था। लेकिन अब ऐसा माना जा रहा है कि सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस फैसले पर पुन: विचार हो सकता है।एनडीए में भी इसकी मांग होती रही है। इधर, जीतनराम मांझी से लेकर अन्य नेता भी शराबबंदी हटाने को लेकर पक्ष में हैं।

राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने में यह एक महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है।इसे हटाना सम्राट के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। शराबबंदी हटी तो राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी होना स्वभाविक है।इससे महिला वोटरों को साधने में बीजेपी के सामने चुनौती हो सकती है। मतदाताओं की नाराजगी भी नई सरकार के मुखिया के हिस्से आ सकती है।

नीतीश कुमार से अपनी अलग पहचान बनाने के लिए सम्राट चौधरी को काफी मेहनत करनी पड़ सकती है। एक तो नीतीश कुमार ने राज्य का मुख्यमंत्री रहते हुए, सुशासनबाबू की छवि बनाई। उनके फैसलों ने सीधे तौर पर राज्य के मतदाताओं को आकर्षित किया। अगर सम्राट चौधरी को उनके कद का नेता भी बनना है तो ऐसी स्कीमें लानीं होंगी, जो सीधे तौर पर राज्य की महिलाओं को साधे, और उनके जीवन में अहम बदलाव ला सके।अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो राज्य के आने वाले चुनाव में पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

Related Articles

Back to top button