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GSLV-F17 मिशन सफल, ISRO चीफ बोले- इस साल 6 और मिशन होंगे लॉन्च

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने शुक्रवार को GSLV-F17 मिशन के सफल प्रक्षेपण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए घोषणा की कि उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-05) को उसकी निर्धारित और आवश्यक कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। उन्होंने इसे देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार देते हुए पुष्टि की कि उपग्रह पूरी तरह से सामान्य और ठीक स्थिति में काम कर रहा है।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने के लगभग 18 मिनट बाद, EOS-05 सैटेलाइट को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ISRO चीफ ने बताया कि यह भारत के इतिहास में पहली बार है जब किसी अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह को 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित जियो-प्लेटफॉर्म पर तैनात किया गया है।

नारायणन ने कहा कि सैटेलाइट की तय लाइफटाइम सात साल है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि यह नौ साल तक काम करता रहेगा।

उन्होंने कहा, “इस सैटेलाइट की अहमियत यह है कि यह पहला सैटेलाइट है जिसे हमारे देश के अर्थ ऑब्ज़र्वेशन मक़सद और कई तरह के इस्तेमाल के लिए 36,000 km ऊँचे जियो-प्लेटफ़ॉर्म पर लगाया जा रहा है। यह आज तक GSLV व्हीकल से लॉन्च किया गया सबसे भारी सैटेलाइट है… इस फाइनेंशियल ईयर में यह दूसरा सफल मिशन है।”

मीडिया ब्रीफ़िंग के दौरान, नारायणन ने कहा कि इस कैलेंडर ईयर में पहले बिना क्रू वाले गगनयान मिशन पर “ज़ोरदार और व्यवस्थित तरीके से” काम चल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि ISRO इस फाइनेंशियल ईयर में छह और लॉन्च करने का लक्ष्य रख रहा है।

उन्होंने कहा, “गगनयान एक टेक्नोलॉजी-बेस्ड मिशन है। आज तक, लगभग 8000 टेस्ट पूरे हो चुके हैं। दूसरे सैटेलाइट मिशन के उलट, इसमें इंसान शामिल हैं, इसलिए इंसानों की सुरक्षा बहुत ज़रूरी है। इसलिए, हमने तीन बिना क्रू वाले मिशन और उसके बाद क्रू वाले मिशन की योजना बनाई है।”

एडवांस्ड अर्थ ऑब्ज़र्वेशन स्पेसक्राफ्ट, जो जियो-ऑर्बिट में भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है, उसे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से GSLV रॉकेट के ज़रिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। स्पेसपोर्ट से उड़ान भरने के लगभग 18 मिनट बाद, EOS-05 सैटेलाइट को तय सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया।

इस मिशन से जुड़े एक सीनियर साइंटिस्ट ने सैटेलाइट को “आसमान में मौजूद आंख” (eye in the sky) कहा है। यह सैटेलाइट रियल-टाइम तस्वीरें उपलब्ध कराएगा और कृषि व आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में देश की मदद करेगा।

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