राजनाथ: आतंकवाद पर नहीं चलेगा कोई दोहरा मापदंड

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों से आतंकवाद के मामले में दोहरे मानदंड अपनाने से इनकार करने और आतंकवादियों को फंडिंग देने, उनका समर्थन करने तथा उन्हें पनाह देने वाले नेटवर्क को मिलकर खत्म करने का आग्रह किया। ताजिकिस्तान के दुशान्बे में SCO की ‘काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट’ की बैठक को संबोधित करते हुए, सिंह ने आतंकवाद को शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया। इस बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी मौजूद थे।
सिंह ने कहा कि आतंकवाद से निपटने में कोई दोहरा मानदंड नहीं होना चाहिए। जो लोग आतंकवादियों को फंडिंग देते हैं, उनका समर्थन करते हैं या उन्हें सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराते हैं, उनके लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को मजबूती से और मिलकर खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत, ताजिकिस्तान के साथ अपनी पुरानी दोस्ती और मध्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है। बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान, हमारे नेताओं ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25 वर्षों की रूपरेखा रखी थी। उस अवसर पर हमने अपनी साझा यात्रा की समीक्षा की और भविष्य की राह पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO से सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों की दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया था। यह संदेश विशेष रूप से SCO की ‘काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट’ के लिए बहुत प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि आज हम एक ऐसे दौर में हैं जहाँ वैश्विक आर्थिक माहौल अनिश्चित है। संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण सप्लाई चेन बाधित हो रही हैं। ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा हमारे लिए चिंता का विषय हैं। नई तकनीक अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही है और नए विभाजन पैदा कर रही है। इसलिए, SCO का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाएगा कि क्या वह कोई साझा आधार खोज सकता है और उस पर काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि हमारा आर्थिक जुड़ाव समावेशी होना चाहिए और इससे सभी देशों को हर तरह से लाभ मिलना चाहिए। हमें सप्लाई चेन को और अधिक मजबूत बनाना चाहिए, व्यापार और निवेश को और आसान बनाना चाहिए, तथा विकास के लिए तकनीक का उपयोग करना चाहिए। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आर्थिक सहयोग का लाभ हमारे समाज के हर वर्ग तक पहुँचे। भारत, बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को लागू करने के लिए 2026–2030 की कार्ययोजना का समर्थन करता है।
रक्षा मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि आतंकवाद विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। आतंकवाद के कारण न केवल निर्दोष लोगों की जान जाती है, बल्कि निवेश और व्यापार भी बाधित होते हैं। आतंकवाद समाजों में कट्टरता फैलाता है और हमारे युवाओं को उन अवसरों से वंचित रखता है, जिनके वे हकदार हैं। इसलिए, आतंकवाद को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। इससे निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं हो सकता। जो लोग आतंकवादियों को आर्थिक मदद देते हैं, उनका समर्थन करते हैं या उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराते हैं, उनके लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। आतंकवाद के पूरे तंत्र को मजबूती से और सामूहिक रूप से खत्म किया जाना चाहिए।






