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छठ पूजा पर झांकी के माध्यम से, केंद्र सरकार पर निशाना,महंगाई की मार,

आरा:छठ पूजा के दौरान बिहार के आरा शहर में एक अनोखा नजारा देखने को मिला. शहर के चौक-चौराहों पर युवाओं द्वार बनाई गई अलग-अलग झांकियां देखने को मिली. इन सभी के बीच बेरोजगारी के थीम पर बनी एक झांकी देखने को मिली, जिसकी काफी चर्चा हो रही है. उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ संपन्न हुआ. आरा शहर में नवादा थाना क्षेत्र अंतर्गत नवादा चौक पर बेरोजगारी के थीम पर बनी झांकी को काफी सराहा जा रहा है. सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है. इसकी कई वीडियो और तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं, जिसमें बेकारी और बेरोजगारी को लेकर स्लोगन लिखे हुए हैं. खुद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने झांकी की तस्वीर ट्वीट कर राज्य सरकार को घेरा है
उन्होंने कहा, ” बिहार में 23 राज्यों से अधिक बेरोजगारी है. बिहार की बेरोजगारी दर देश की बेरोजगारी दर से कई गुना अधिक है. 16 वर्षों की नीतीश-भाजपा सरकार देश के सबसे युवा प्रदेश बिहार के युवाओं को स्थायी नौकरी देने, रोजगार सृजन करने, उद्योग धंधे लगाने एवं पलायन रोकने में पूर्णतया विफल रही है.”
बता दें कि झांकी में युवाओं ने विशेषकर बिहार विधान परिषद में चपरासी, सफाईकर्मी, माली और दरबान जैसे पदों पर निकली वैकेंसी, पीएम मोदी द्वारा दिए गए पकौड़े वाले बयान और बहाली प्रक्रिया व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे पर फोकस किया है. साथ ही छठ पूजा के पारंपरिक रूपरेखा को भी दिखाया गया है.

एक ही नजर में अपनी ओर दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने वाले इस झांकी में सबसे ज्यादा बिहार विधान परिषद में इस साल जनवरी महीने में निकली चपरासी की बहाली को फोकस किया गया है. इसमें कलाकारों ने दिखाया है कि किस तरीके से विधान परिषद में फोर्थ ग्रेड यानी कि चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की बहाली के लिए इंटरव्यू में बीटेक, बीएड, स्नातक और स्नातकोत्तर के छात्र चपरासी की नौकरी लेने वालों की लाइन में दिखे.
बता दें कि इसी साल जनवरी महीने में विधान परिषद की ओर से फोर्थ ग्रेड के 134 पदों पर बहाली के लिए वैकेंसी निकाली थी. गौरतलब हो किअभी हाल ही में पाकिस्तान में भी चपरासी की बहाली के लिए 15 लाख आवेदन आये थे, जिसकी चर्चा इंडियन मीडिया में भी काफी हुई थी. यहां तक कि पीएचडी स्कॉलर ने भी चपरासी और दरबान की नौकरी के लिए अप्लाई किया था.
झांकी में अलग-अलग स्लोगन भी लिखे गए थे. जैसे, ‘हाय रे रोजगार, भटक रहे युवा बेरोजगार’, ‘युवा है लाचार, चारों तरफ है बेरोजगार, हाय रे सरकार’, ‘बेरोजगारी इतनी बढ़ा दी कि डिग्री भी काम न आई’, ‘नौकरी चाहीं सरकारी, न त बइठ के बेचा तरकारी’, ‘ऐसे ही थोड़े न भइल ह, दस लाख दे के अइनी ह’, ‘हाय रे महंगाई, हाय रे महंगाई, महंगाई की मार, सब पे छाई’ और ‘फसल तो अच्छा हुआ लेकिन बाढ़ ने सारा फसल बर्बाद कर दिया’. इस तरह के कई स्लोगन झांकी में लगाए गए हैं, जो बेरोजगारी, महंगाई, बाढ़ और भ्रष्टाचार को लेकर अलग-अलग मैसेज दे रहे हैं.

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