Breaking
CM धामी- अग्निवीर को 10% रिजर्वेशन देकर सुरक्षित करेंगे भविष्यईरान के मिसाइल हमले हुए कम, क्या है तेहरान की नई रणनीति?नहीं बढ़ेगा LPG गैस का दाम? सरकारी सूत्रों ने कहा- देश में पर्याप्त स्टॉकबुकिंग में आ रही है समस्या, कई जगह गैस वेंडर नहीं उठा रहे फ़ोनकई जगह होटल और रेस्ट्रोरेंट एलपीजी गैस की किल्लत से बंदEarly News Hindi Daily E-Paper 11 March 2026पाक एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने वाला आदर्श कुमार उर्फ ​​लकी पुलिस की गिरफ्त मेंजंग के बीच तेल-गैस की किल्लत, क्‍या भारत में भी बढ़ेंगे दाम?T20 वर्ल्ड कप फाइनल में पर भारत की एकतरफा जीत, लगातार दो बार जीतने वाली बनी पहली टीमईरान के राष्ट्रपति का ऐलान, कहा- जब तक पड़ोसी देशों की ओर से ईरान पर नहीं होता हमला, तब तक ईरान हमला करेगा बंद
भक्ति पोस्ट

भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत…

प्रदोष व्रत भगवान शिव की पूजा का उत्तम दिन होता है। हर मास की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखते हैं। एक माह में दो प्रदोष व्रत होते हैं एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में। इस समय हिन्दी कैलेंडर के भाद्रपद माह का कृष्ण पक्ष चल रहा है। भद्रपद मास का पहला प्रदोष व्रत शनिवार के दिन है, इसलिए वह शनि प्रदोष व्रत है। शनि प्रदोष व्रत 04 ​सितंबर को है। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। आइए जानते हैं शनि प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व के बारे में।

शनि प्रदोष 2021 तिथि

हिन्दी पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी ति​थि का प्रारंभ 04 सितंबर दिन शनिवार को सुब​ह 08 बजकर 24 मिनट पर हो रहा है। इसका समापन अगले दिन 05 सितंबर को प्रात: 08 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में भाद्रपद मास का पहला प्रदोष व्रत 04 सितंबर को रखा जाएगा।

शनि प्रदोष 2021 पूजा मुहूर्त

04 सितंबर को शनि प्रदोष की पूजा के लिए 02 घंटा 16 मिनट का मुहूर्त प्राप्त हो रहा है। जो लोग शनि प्रदोष व्रत रखेंगे, उनको उस दिन शाम को 06 बजकर 39 मिनट से रात 08 बजकर 56 मिनट के बीच शनि प्रदोष की पूजा कर लेनी चाहिए। इस प्रदोष मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए।

शनि प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रतों में शनि प्रदोष व्रत को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। शनि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति पर शिव और शक्ति दोनों की कृपा प्राप्त होती है और संतान की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य नि:संतान दंपत्तियों को शनि प्रदोष व्रत रखने की सलाह देते हैं।

Related Articles

Back to top button