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उत्तर प्रदेशराज्य

ब्राह्मणों को लुभाने के चक्कर में राम के बाद परशुराम पर आई यूपी की सियासत

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क । 

लखनऊ। सूबे  की राजनीति में अब भगवान राम से आगे बढ़ते हुए परशुराम तक जा पहुंची है। यही वजह है कि पिछले  रविवार को अखिलेश यादव ने लखनऊ में भगवान परशुराम की मूर्ति का अनावरण किया था।

आपको बता दें कि अखिलेश यादव ने पूर्वांचल एक्सप्रेस के पास एक मंदिर में 108 फुट ऊंची परशुराम की प्रतिमा का अनावरण किया था। कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की 13 फीसदी के करीब आबादी है।

 

अब डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा समेत कई भाजपा नेताओं ने भगवान परशुराम की प्रतिमा का अनावरण किया है। इस दौरान दिनेशन शर्मा के अलावा भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी, उनके बेटे मयंक जोशी, योगी सरकार के मंत्री ब्रजेश पाठक समेत कई सीनियर नेता मौजूद थे। इन नेताओं में से ज्यादातर ब्राह्मण समुदाय से ही जुड़े हुए थे। माना जा रहा है कि ब्राह्मण बिरादरी को यूपी चुनाव से पहले साधने की कोशिश में ही भाजपा ने यह कदम उठाया है।

भगवान परशुराम की छह फुट ऊंची प्रतिमा राजस्थान से खरीदकर लाई गई है। दरअसल यूपी में बीते कई सालों से यह बात कही जा रही है कि राज्य सरकार से ब्राह्मण बिरादरी नाखुश है। ऐसे में उसे लुभाने के लिए भाजपा, सपा समेत कई पार्टियां जुटी हुई हैं। बीएसपी तो लंबे समय से ब्राह्मण बिरादरी को लुभाने के प्रयास करती रही है। इस बार भी वह राज्य भर में प्रबुद्ध सम्मेलनों के जरिए ब्राह्मणों को साधने में जुटी है। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा कि अखिलेश पहली बार इस तरह का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भाजपा तो पहले भी भगवान परशुराम की प्रतिमाएं लगवा चुकी है।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के दौर में कई पार्कों का नाम भगवान परशुराम पर ही रखा गया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ परशुराम ही नहीं बल्कि भाजपा ने तो समाज के सभी वर्गों के नायकों का सम्मान किया है। संत रविदास, वाल्मीकि और राणा प्रताप का भी सम्मान किया गया है।

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