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UGC बिल पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा- ये नियम समाज को बांट देंगे

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जातिगत भेदभाव की परिभाषा से संबंधित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2026 के समानता नियमों के संचालन पर रोक लगा दी और नए ढांचे को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किए। याचिकाओं की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा कि वह शिक्षण संस्थानों में “स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी वातावरण” चाहता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि नए नियम समाज को विभाजित कर सकते हैं। पीठ ने निर्देश दिया कि 2012 के पुराने नियम फिलहाल लागू रहेंगे।

सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली पीठ आज बाद में इस मामले की सुनवाई करेगी। यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ याचिकाएं अधिवक्ता विनीत जिंदल, मृत्युंजय तिवारी और राहुल दीवान ने दायर की हैं। यूजीसी ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में वंचित समूहों की शिकायतों के निवारण और सहायता के लिए एक संरचित ढांचा तैयार करना है। इस बीच, यूजीसी के नए नियमों ने छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक समूहों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है, क्योंकि यूजीसी के नियमों में “जाति-आधारित भेदभाव” शब्द की परिभाषा को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई है।

मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले की जांच के लिए कुछ प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति गठित करने के बारे में सोचने को कहा ताकि समाज बिना किसी भेदभाव के एक साथ विकास कर सके। अधिवक्ता विष्णु जैन ने तर्क दिया, धारा 3सी के तहत यह परिभाषा अनुच्छेद 14 के दायरे से पूरी तरह से बाहर है, क्योंकि भेदभाव को पहले ही परिभाषित किया जा चुका है और यह नहीं माना जा सकता कि भेदभाव केवल एक वर्ग के खिलाफ है।

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