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वियतनाम के साथ रक्षा मंत्री की इमरजेंसी मीटिंग

कहते हैं कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। बता दें कि भारत ने इसी फार्मूले पर चलते हुए चीन को उसी के इलाके में घेरना शुरू कर दिया है। जिस चीन ने पाकिस्तान को आगे करके भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की। साजिश रची। अब भारत भी ड्रैगन के खिलाफ एक ऐसा ही चक्रव्यूह तैयार कर रहा है जिसने बीजिंग की नींद उड़ा दी है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कि इस वक्त वियतनाम में है लेकिन यह कोई साधारण विदेश यात्रा नहीं है। यह वो चाल है भारत की जिसने चीन को अंदर तक हिला कर रख दिया है। क्योंकि इस बार भारत सिर्फ बयान नहीं दे रहा बल्कि चीन की सबसे बड़ी कमजोरी पर सीधा वार कर रहा है। अटैक कर रहा है। दरअसल आपको बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचे। जहां रक्षा साझेदारी, समुद्री सुरक्षा और बड़े हथियार सौदों पर बातचीत हुई है। सबसे ज्यादा चर्चा ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर इस वक्त वहां पर हो रही है। यह कयास सामने आए हैं। वियतनाम लंबे समय से भारत की इस सुपरसोनिक मिसाइल को खरीदना चाहता है। इसके अलावा आपको यह भी बता दें कि आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और पिनाका रॉकेट सिस्टम पर भी चर्चा काफी तेज है।

दक्षिण चीन सागर यानी वो समुद्री इलाका जहां से दुनिया के करीब 30% व्यापार गुजरता है। अरबों डॉलर का तेल, गैस और इंटरनेशनल सप्लाई इसी रास्ते से जाती है और इसी वजह से बीजिंग चिंता में है और चीन यह चाहता है कि इस पूरे इलाके पर सिर्फ उसी का ही कंट्रोल हो। लेकिन चीन वहां कृत्रिम द्वीप बना रहा है। मिसाइल सिस्टम तैनात कर रहा है और छोटे देशों को डराकर अपना दबदबा कायम रखना चाहता है जो उसकी पुरानी रणनीति है। लेकिन अब भारत ने चीन के इसी खेल में सबसे बड़ा ट्विस्ट लाकर रख दिया है। भारत अब सिर्फ हिमालय में चीन को रोकने की रणनीति नहीं चल रहा है। बल्कि आपको बता दें कि समुद्र में भी ड्रैगन को घेरने की तैयारी भारत ने पूरी कर ली है और इस पूरे मिशन में वियतनाम सबसे अहम देश बन गया है। क्यों? इसका कारण आपको बता देते हैं।  बता दें कि वियतनाम वो देश है जिसने इतिहास में चीन के सामने झुकने से इंकार कर दिया था। 1979 में दोनों देशों के बीच युद्ध तक हुआ था। आज भी वियतनाम दक्षिण चीन सागर में चीन की हर चाल का खुलकर सामने आकर विरोध करता है।

चीन आज बाहर से जितना ताकतवर दिखता है, अंदर से चाइना उतना ही दबाव में है। उसकी आबादी बूढ़ी होती जा रही है। युवा वर्क फोर्स लगातार घट रही है। दुनिया की कंपनियां चीन छोड़कर दूसरे देशों में इस वक्त जा रही है और यह कई सारी रिपोर्ट्स में दावा किया गया और यहीं पर वियतनाम चीन के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है। करीब बता दें कि रिपोर्ट्स के मुताबिक 10 करोड़ आबादी वाला वियतनाम तेजी से नया मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है। युवा आबादी है। सस्ता लेबर है। मजबूत समुद्री लोकेशन है। और सबसे बड़ी बात चीन के खिलाफ खुला स्टैंड है वियतनाम का। यानी भारत ने चीन को वहीं घेरना शुरू किया है जहां उसे सबसे ज्यादा दर्द होता है। भारत अब सिर्फ सीमा पर सैनिक खड़े नहीं कर रहा है बल्कि चीन की सप्लाई चेन, उसकी समुद्री ताकत और उसके एशियाई दबदबे को सरेआम चुनौती देने वाला पूरा नेटवर्क यहां पर भारत के द्वारा तैयार किया जा रहा है। फिलीपींस को ब्रह्मोस दिया। इंडोनेशिया के साथ रक्षा साझेदारी की और अब वियतनाम के साथ बड़ा रक्षा गठजोड़। यानी चीन को चारों तरफ धीरे-धीरे एक ऐसा सुरक्षा घेरा चीन की तरफ बना लिया है भारत ने जो आने वाले समय में ड्रैगन की सबसे बड़ी परेशानी बन सकता है और यही वजह है कि राजनाथ सिंह ने हनोई में भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था और इसी के साथ-साथ बढ़ते एफडीआई का भी जिक्र किया है। उन्होंने यह साफ कहा है राजनाथ सिंह ने कि वैश्विक संकट और तेल तनाव के बावजूद भारत मजबूती से खड़ा है।

रणनीति पूरी तरीके से तैयार है। यह सिर्फ आर्थिक बयान नहीं था बल्कि दुनिया को दिया गया एक साफ संदेश था कि अब एशिया में चीन का विकल्प तैयार हो चुका है और उसका नाम है भारत और अगर वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल मिल जाती है भारत द्वारा तो दक्षिण चीन सागर में चीन के युद्धपोतों की मुश्किलें कई गुना ज्यादा बढ़ जाएगी क्योंकि ब्रह्मोस इतनी तेज मिसाइल है कि दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिलता है। यह मिसाइल इतनी खतरनाक है पाकिस्तान से पूछ लीजिए। यानी ये साफ है कि भारत अब सिर्फ जवाब नहीं दे रहा बल्कि चीन के पूरे एशियाई खेल को पलटने की तैयारी पहले ही कर चुका है और उस पर काम अब किया जा रहा है और यही वजह है कि राजनाथ सिंह का यह दौरा बीजिंग के लिए सिर्फ एक विदेश यात्रा नहीं है बल्कि आने वाले बड़े भू राजनीतिक तूफान का एक साफ संकेत भी इसे माना जा रहा है।

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