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उत्तर प्रदेश

बरेली की यह शिक्षिका बनी अन्य शिक्षकों के लिए मिसाल

बरेली: वैसे तो बच्चों की पढ़ाई को लेकर समय-समय पर अन्य प्रयोग होते रहते हैं लेकिन बरेली की इस शिक्षिका ने अपने प्रयोगों से अन्य लोगों को भी प्रेरणा दी है इन्होंने इन प्रयोगों के लिए सरकार की सहायता नहीं बल्कि अपनी तनख्वाह का ही एक हिस्सा जुटाकर उसे बच्चों की पढ़ाई को और रुचिकर बनाने में इस्तेमाल किया।स्कूल में प्रोजेक्टर लगवाया। विज्ञान के मुश्किल फार्मूलों और प्रयोगों के लिए लैब तैयार कराकर संसाधन जुटाए। स्कूल के बच्चों को इतिहास के संदर्भ याद रखने में दिक्कत होने पर उन्होंने नाट्य मंचन का सहारा लिया। अब उनके अभिनव प्रयोग मिसाल बन चुके हैं।

 

सुभाषनगर की बीडीए कालोनी में रहने वाली तृप्ति माहौर को पांच सितंबर को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाना है। इस राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए उत्तर प्रदेश से दो ही शिक्षकों का चयन हुआ है। जिसमें बरेली की रहने वाली तृप्ति का नाम भी शामिल है। उनकी इस उपलब्धि से शहर तो गौरवांवित हुआ है। साथ ही परिवार में भी खुशी का माहौल है। तृप्ति वर्तमान में रामपुर के राजकीय बालिका इंटर कालेज में सहायक अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर इस पुरस्कार से नवाजा जाएगा।

 

ताकि कोई कान्वेंट स्कूल से कम न समझे हमारे बच्चों को

 

तृप्ति ने बताया कि कान्वेंट स्कूल के बच्चों की तुलना में सरकारी स्कूल के बच्चों को कम आंका जाता है। सिर्फ इसी सोच को खत्म करने के लिए उन्होंने कई प्रयास किए। जिसकी वजह से वह सम्मानजन पुरस्कार की हकदार हुईं। बताया कि उन्होंने बच्चों को पढ़ाने नहीं उन्हें हर विषय के टापिक की अच्छी समझ कराने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए। यही वजह है कि पिछले साल पहली बार विज्ञान की मंडलीय प्रतियोगिता में उनके कक्षा की छात्रा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

कविताओं और पहेलियों से समझाई कठिन विषय

उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के जरिये बच्चों को सीधे जोड़ने का प्रयास किया। शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कविताओं और पहेलियों का इस्तेमाल किया। कुछ महीनों के प्रयास से बच्चों को कठिन विषयवस्तु भी आसानी से समझ आने लगी। उनकी कोशिशें बच्चों के बौद्धिक विकास में मददगार साबित हुई

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