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जंग के बीच तेल-गैस की किल्लत, क्‍या भारत में भी बढ़ेंगे दाम?

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट की जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज है. सप्लाई चेन बाधित होने की वजह से दुनिया के तमाम देशों में तेल और गैस की किल्लत हो रही है. भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश की हालात खराब हो चुकी है. पाकिस्तान में तेल की कमी के चलते स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल की ब्रिकी सीमित कर दी गई है. भारत तक भी इस युद्ध की लपटें पहुंचने लगी है. कच्चे तेल की आसमान छूती कीमत से तेल कंपनियों का बहीखाता बिगड़ रहा है. सरकार ने फिलहाल तेल की बढ़ती कीमत के असर से आम जनता को बचाकर रखा है, लेकिन भारत सरकार और तेल कंपनियां जब इस दबाव को झेल नहीं पाएंगी और हाथ खड़े कर देंगी तो इसका असर आम जनता पर पहुंचेगा. मिडिल ईस्ट की जंग से भारत खुद को कैसे बचाएगा ? क्या है भारत सरकार की तैयारी ? भारत के पास कितने दिन का तेल और गैस है ?  भारत में कब तक तेल की कीमतों को बढ़ने से रोका जा सकता है ? समझने की कोशिश करते हैं.

मिडिल ईस्ट तेल और गैस का प्रमुख उत्पादक और सप्लायर हैं. भारत अपनी गैस जरूरत का 80 फीसदी मिडिल ईस्ट से आयात करता है. सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे देशों से भारत LPG आयात करता है. वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जहां से दुनिया के तेल का 20 फीसदी और भारत के तेल आयात का 50 फीसदी गुजरता है, वो रास्ता युद्ध की चपेट में आ गया है. जिस रास्ते से पहले रोजाना 137 जहाज गुजरते थे, वहां से अब 2 से 3 जहाज गुजर रहे हैं. ऐसे में ग्लोबल सप्लाई चेन टूटना और कीमतों में आग लगना तय था. कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, हालांकि 10 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद तेल की कीमत गिरकर 89 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई. दरअसल ट्रंप ने भरोसा दिलाया कि ईरान की जंग जल्द खत्म होगी. जिसके बाद तेल में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है.

भारत तेल और गैस दोनों के लिए आयात पर निर्भर है. ऐसे में मिडिल ईस्ट की जंग का असर भारत पर पड़ रहा है. तेल की बढ़ती कीमत को सरकार ने फिलहाल रोक रखा है, लेकिन गैस सिलेंडर के रेट बढ़ा दिए गए हैं. शनिवार को ही इंडियन ऑयल ने रसोई गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये और कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में 115 रुपये बढ़ा दिए है. ऊर्जा संकट और एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव को देखते हुए सरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है. साथ ही साथ एलपीजी की जमाखोरी रोकने के लिए बुकिंग के नियम बदलकर इसे 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है. भारत दुनिया भर के 41 देशों से तेल आयात करता है. अगर भारत के स्ट्रैटेजिक रिजर्व की बात करें तो ये लगभग 50 दिन के करीब है.

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