प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आया निर्देश
अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।
नई दिल्ली। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को सुनवाई की। यह प्रदर्शन शनिवार को हुआ था। सुनवाई के बाद वकीलों ने बताया कि अदालत ने लोगों की आवाजाही, इंटरनेट सेवाओं और मेट्रो व ट्रेनों के संचालन को लेकर जरूरी निर्देश दिए हैं।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत के आदेश पर आभार जताया। वहीं, वकील कैलाश मोरे और गौरव यादव ने बताया कि सुनवाई के बाद मेट्रो स्टेशन सामान्य रूप से चल रहे हैं और इंटरनेट सेवाएं भी बहाल कर दी गई हैं।
सुनवाई के बाद वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के बहुत आभारी हैं। अदालत ने ऐसा आदेश दिया है, जिससे देश की न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा फिर मजबूत होता है।”
वकील कैलाश मोरे ने बताया कि इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और रविवार को सभी मेट्रो स्टेशन सामान्य रूप से चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने साफ किया कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना लोगों का मौलिक अधिकार है। लोग बिना हथियार और कानून का पालन करते हुए प्रदर्शन कर सकते हैं।
मोरे के मुताबिक, दिल्ली के बाहर से आने वाली जिन ट्रेनों को पहले नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर रुकने से रोका गया था, उनके सामान्य संचालन के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में लोगों के आने-जाने पर लगी रोक हटा दी गई है। अब नागरिक शहर में स्वतंत्र रूप से आ-जा सकते हैं।
कैलाश मोरे ने बताया कि अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून की तय प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि शनिवार को हुई गिरफ्तारियों और हिरासत के बाद अगर किसी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से रोका गया है, तो उसे छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
वकील गौरव यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे, मेट्रो और सड़क यातायात को सामान्य करने की बात कही है। उन्होंने कहा, “सभी बैरिकेड हटाने और इंटरनेट सेवाएं बंद नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं, जब तक ऐसा करना बिल्कुल जरूरी न हो। हम अदालत का धन्यवाद करते हैं।”







