Breaking
Rahul Gandhi के धरने पर Ravi Shankar Prasad ने कहा – यह अराजकता की राजनीति हैक्या इस देश में FIR की मांग करना क्या अनार्की है- कांग्रेसराहुल का ये धरना सस्ती लोकप्रियता के लिए है- नड्डाराहुल गाँधी के धरने को लेकर जेपी नड्डा की प्रेस- बोले ये राहुल की हताशा और हठयोग है, ये धरना छात्रों के लिए नहीं है.Delhi Police संसद मार्ग कार्यालय पर Rahul Gandhi का धरना ,बोले,FIR होगी तभी हटेंगे बीजेपी ने कहा राहुल अराजकता फैला रहे हैंसावन सोमवार पर CM योगी ने गोरखनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक कियाMEA Press Briefing : FCRA पर अमेरिकी टिप्पणी को भारत ने किया खारिज, बोला ‘हमारी संसद ही लेगी फैसला’Rahul Gandhi का बड़ा आरोप: Delimitation से BJP छीनना चाहती है Tamil Nadu की ताकतApple ला रहा फोल्डेबल फ़ोन, 7.8-इंच स्क्रीन और A20 Pro चिपसेट वाला Iphone Ultraयुवाओं के नाम लिखा पत्र लिख धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
Breaking Newsराजनीतिराष्ट्रीय

बीजेपी के 12 विधायकों के लाभ के पद के मुद्दे पर अयोग्यता की गिरी गाज ।

इम्फाल: मणिपुर में लाभ के पद के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है।यहां, पार्टी के 12 विधायकों पर अयोग्य होने का खतरा मंडरा रहा है। गुरुवार को इस मामले में शीर्ष अदालत में हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि मणिपुर के गवर्नर जल्द ही लाभ के पद के मुद्दे पर भाजपा के 12 विधायकों की अयोग्यता के संबंध में निर्वाचन आयोग की तरफ से दिए गए राय पर फैसला लेंगे।

दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने गवर्नर के फैसले को लेकर सवाल किया था। जिसके बाद सॉलिसिटर जनरल की तरफ से अदालत को यह जानकारी दी गई। लाभ के पद के मुद्दे पर चुनाव आयोग ने जनवरी में एक गवर्नर को अपनी राय भेज दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा के अनुच्छेद 192 के मुताबिक, गवर्नर को निर्णय लेना होता है। बीते 11 महीनों में कुछ भी नहीं हुआ है। हम एक और आदेश पारित नहीं करना चाहते हैं। अदालत को जवाब देते हुए मेहता ने कहा कि मैं आश्वासन देता हूं कि हम इस पर कुछ करेंगे, इस बारे में किसी किस्म का कोई दिशा-निर्देश पारित करने की जरूरत नहीं होगी।

बता दें कि इससे पहले की सुनवाई में शीर्ष अदालत ने कहा था कि मणिपुर के राज्य लाभ के मुद्दे पर भाजपा के 12 विधायकों की अयोग्यता के संबंध में निर्वाचन आयोग की तरफ से दी गई राय को लेकर बैठे नहीं रह सकते हैं। अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब पीठ को बताया गया है कि गवर्नर को अभी 13 जनवरी, 2021 को प्रस्तुत चुनाव आयोग की राय पर फैसला लेना है।

Related Articles

Back to top button