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SRMU ने किया सफल कार्यशाला का आयोजन

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

लखनऊ। श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (SRMU), लखनऊ–देवा रोड, बाराबंकी के अंतर्गत प्रबंधन, वाणिज्य एवं अर्थशास्त्र संस्थान (IMCE) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला सह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) के पहले तीन दिनों की सफलता पूर्वक पूर्णता की घोषणा की गई है। यह कार्यक्रम “शिक्षक-केंद्रित एवं छात्र-केंद्रित शिक्षण रणनीतियाँ” विषय पर आधारित है और दिनांक 15 जुलाई से 19 जुलाई 2025 तक वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को पारंपरिक शिक्षण एवं सक्रिय छात्र भागीदारी के बीच संतुलन बनाने वाले नवोन्मेषी, कक्षा-परीक्षित शिक्षण उपकरणों से सशक्त बनाना है।


यह निःशुल्क और वैश्विक रूप से खुला कार्यक्रम SRMU के दूरदर्शी नेतृत्व — कुलाधिपति इं. पंकज अग्रवाल, प्रो-कुलाधिपति इं. पूजा अग्रवाल एवं कुलपति प्रो. (डॉ.) विकास मिश्रा — के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। IMCE के संयोजक एवं सह-संयोजकगण तथा आयोजन समिति के समर्पित सदस्यों द्वारा इसका सफल संचालन किया जा रहा है। प्रथम दिवस पर उद्घाटन भाषण प्रो. (डॉ.) कुजतीम ज़िल्फीजाज (UBT, कोसोवो) द्वारा दिया गया, जिनके विश्वविद्यालय के साथ हाल ही में SRMU का एक MoU भी हस्ताक्षरित हुआ है। उनका विषय था “द एड-मैन क्लासरूम: ऑपरेशनलाइज़िंग पैडगॉजीज़ विद मैनेजमेंट साइंस।” दूसरे दिन डॉ. वकार अहमद (तिश्क इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, इराक) ने शिक्षक-केंद्रित रणनीतियों के नैतिक एवं प्रबंधकीय पक्षों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।
अन्य प्रमुख वक्ताओं में शामिल हैं:
• प्रो. (डॉ.) कविता शास्त्री, अरुणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज़
• प्रो. (डॉ.) सीमा, टेक्नो ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स, लखनऊ
• राकेश सिंह, राज्य प्रमुख (उत्तर प्रदेश), विश्व बैंक एवं यूनिसेफ़
• शिवम मिश्रा, आकाश इंस्टिट्यूट, लखनऊ
• डॉ. मोहम्मद शिराज़, COER यूनिवर्सिटी, रुड़की
• कु. दिव्या, AIMT, लखनऊ
कार्यशाला में 21वीं सदी की शिक्षा से संबंधित प्रमुख चुनौतियों पर विचार किया गया, जिनमें डिजिटल परिवर्तन, समावेशी शिक्षा, लचीला पाठ्यक्रम डिज़ाइन तथा प्रभावी मूल्यांकन जैसी रणनीतियाँ शामिल रहीं।
भारत और विदेशों से 300 से अधिक शिक्षकों ने पंजीकरण कर इस कार्यक्रम में भागीदारी की, जो उच्च शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण एवं व्यावसायिक विकास संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कार्यक्रम में इंटरएक्टिव Q&A, ब्रेकआउट चर्चाएँ एवं सहभागिता आधारित शैक्षणिक गतिविधियाँ शामिल रहीं, जिससे सत्रों में गहराई और जीवंतता आई। प्रस्तुतियाँ, लाइव पोल्स और वर्चुअल ब्रेकआउट रूम्स ने सत्रों को अधिक आकर्षक और सहभागिता-पूर्ण बनाया, जिससे शिक्षण और सीखने की पहुँच दोनों में वृद्धि हुई।

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