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लोक सभा में विमेंस रिजर्वेशन और डिलिमिटेशन पर 3 बिल पेश

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विपक्ष के कड़े विरोध के बीच लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए हैं। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक पेश किया, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ा संशोधन विधेयक पेश किया। संविधान संशोधन विधेयक को पेश करने के पक्ष में 251 वोट पड़े, जबकि 185 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण को सही तरीके से लागू करने के लिए ये तीनों विधेयक एक साथ लाना जरूरी है।

कांग्रेस, सपा और द्रमुक समेत कई विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को ‘असंवैधानिक’ बताया है। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने सवाल उठाया कि जब 2023 में ही महिला आरक्षण बिल पास हो गया था, तो उसे तभी लागू क्यों नहीं किया गया? उन्होंने सरकार पर 2029 के चुनावों से डरने का आरोप लगाया। वहीं, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं ने कहा कि जनगणना के बिना परिसीमन करना संविधान की भावना के खिलाफ है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि इन बदलावों से देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुँच सकता है।

विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी केवल तकनीकी आधार पर बात होनी चाहिए, विधेयकों की अच्छाइयों या बुराइयों पर चर्चा बाद में की जाएगी। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि चर्चा के दौरान विपक्ष को बोलने का पूरा मौका दिया जाए, ताकि सरकार भी मजबूती से अपना पक्ष रख सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तीनों विधेयक एक-दूसरे से जुड़े हैं। दूसरी ओर, असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने चिंता जताई कि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है और हिंदी भाषी क्षेत्रों का दबदबा बढ़ जाएगा।

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