Breaking
एलपीजी की किल्लत ख़तम, रसोई गैस लेकर आ रहे हैं दो जहाजों को ईरान के अधिकार क्षेत्र से गुजरने की मिली अनुमतिFBI की हैरान करने वाली रिपोर्ट, क्या अमेरिका में घुसकर मारेगा ईरान?HPCL के प्लांट में डबल मर्डर, पुलिस ने आरोपी के दोनों टांगों में मारा गोलीEarly News Hindi Daily E-Paper 13 March 2026Opposition के ‘Mic Off’ के आरोप पर स्पीकर ओम बिरला का पलटवार, कहा- मेरे पास कोई बटन नहीं हैदेश के कई शहरों में होटल रेस्ट्रोरेंट और ढाबे बंददेश भर में एलपीजी घरेलू सिलेंडर की किल्लत, जबकि कमर्शियल सिलेंडर मिलना बंदCM धामी- अग्निवीर को 10% रिजर्वेशन देकर सुरक्षित करेंगे भविष्यईरान के मिसाइल हमले हुए कम, क्या है तेहरान की नई रणनीति?नहीं बढ़ेगा LPG गैस का दाम? सरकारी सूत्रों ने कहा- देश में पर्याप्त स्टॉक
अंतर्राष्ट्रीय

NATO क्यों नहीं दे रहा यूक्रेन का साथ? जाने

ब्रसेल्स। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग को 19 दिन गुजर चुके हैं और इस बीच दुनिया ने तबाही का मंजर देखा है. युद्ध को लेकर यूरोपीय यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल ने सोमवार को एक इंटरव्यू में बताया कि यूरोपीय संघ रूस के साथ युद्ध में शामिल नहीं है. रशिया टुडे के मुताबिक चार्ल्स मिशेल ने कहा कि पश्चिमी देशों को मास्को और कीव के बीच संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहिए.

अपने बयान को लेकर तर्क देते हुए चार्ल्स मिशेल ने कहा कि रूस और नाटो के बीच टकराव का मतलब परमाणु विश्वयुद्ध से कम नहीं होगा. फ्रांस के वर्साय में हुए यूरोपीय संघ के शिखर सम्मेलन के अगले दिन शनिवार को बेल्जियम के पूर्व प्रधानमंत्री ने एल पेस से कहा था, ‘रूस एक परमाणु शक्ति है और हम अच्छी तरह से जानते हैं कि अगर यह संघर्ष नाटो और रूस के बीच संघर्ष में बदल जाता है, तो हम तीसरे विश्वयुद्ध में शामिल हो जाएंगे.’ यूक्रेन लगातार नाटो से जंग में साथ देने की गुहार लगा रहा है लेकिन शायद इसी डर से NATO ने सीधे तौर पर खुद को जंग से अलग रखा है.

मिशेल ने बातचीत पर जोर देते हुए चेतावनी दी कि सभी संघर्ष नाटकीय, चरम और अक्सर कठिन होते हैं, लेकिन रूस की परमाणु क्षमताएं मास्को के साथ किसी भी संभावित सैन्य गतिरोध में एक नया, एक अलग प्रकृति का आयाम जोड़ती हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं व्यावहारिकता की वकालत करता हूं. यूरोप को सैन्य कार्रवाई से प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय पहुंच, यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थिति और मास्को व कीव के बीच शांति वार्ता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.’

मिशेल ने कहा, ‘हमें आज क्रेमलिन में जो कोई भी है, उससे बात करने की जरूरत है, क्योंकि लोकतंत्र वाले राष्ट्रों को सभी राष्ट्रों से बात करनी चाहिए, भले ही उन्हें लोकतांत्रिक न समझा जाए.’

रूस अमेरिका और नाटो मुल्कों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए हैं और उसने पिछले दिनों अपने दुश्मन देशों की एक लिस्ट भी जारी की थी. इस लिस्ट में जापान समेत EU के 27 देशों के नाम शामिल थे.

Related Articles

Back to top button