Breaking
सावन सोमवार पर CM योगी ने गोरखनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक कियाMEA Press Briefing : FCRA पर अमेरिकी टिप्पणी को भारत ने किया खारिज, बोला ‘हमारी संसद ही लेगी फैसला’Rahul Gandhi का बड़ा आरोप: Delimitation से BJP छीनना चाहती है Tamil Nadu की ताकतApple ला रहा फोल्डेबल फ़ोन, 7.8-इंच स्क्रीन और A20 Pro चिपसेट वाला Iphone Ultraयुवाओं के नाम लिखा पत्र लिख धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफाCJP Protest: दिल्ली में सुरक्षा सख्त, 16 मेट्रो स्टेशन बंद, CRPF की 20 कंपनियां तैनातमानसून सत्र में कांग्रेस और विपक्ष ने की परीक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, राम मंदिर चंदा विवाद और नीट घोटाले पर कार्यस्थगन नोटिससोनम वांगचुक को निजी अस्पताल ट्रांसफर करने की मांग खारिज, परिवार को 24×7 मुलाकात की इजाजतरोहित शर्मा की 138 रन की धमाकेदार पारी, बने लॉर्ड्स में शतक लगाने वाले पहले भारतीय,BRICS का ड्रग्स के खिलाफ ऐलान, अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट पर लगाएगा पाबंदी
Breaking Newsराष्ट्रीय

मौलाना मदनी ने कृषि कानून वापस लेने को सराहते हुए रखी अपनी भी मांग |

नई दिल्ली : कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद से सभी अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं अब मुस्लिम समाज के जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सरकार द्वारा कृषि कानूनों को वापस लेने का स्वागत करते हुए अपनी बात भी सामने रखी।साथ ही मांग की है कि सरकार नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को भी कृषि कानूनों की तरह वापस ले ।

शुक्रवार को मीडिया में जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि एक बार फिर सच सामने आया है कि अगर किसी जायज मकसद के लिए ईमानदारी और धैर्य के साथ आंदोलन चलाया जाए तो उसमें कामयाबी जरूर मिलती है। सीएए आंदोलन ने किसानों को कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए प्रोत्साहित किया। क्योंकि किसानों की तरह सीएए के खिलाफ चले आंदोलन में महिलाएं भी न्याय के लिए दिन रात सड़कों पर बैठी रहीं। जनता के इरादों के आगे आंदोलन को तोड़ा या दबाया नहीं जा सका।

उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को अब उन कानूनों पर भी ध्यान देना चाहिए जो देश के अल्पसंख्यकों के संबंध में लाए गए हैं। कृषि कानूनों की तरह ही सीएए को भी वापस लेना चाहिए। इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र और जन शक्ति सर्वोपरि है।

Related Articles

Back to top button