Breaking
DG ITBP के बयान पर विदेश मंत्रालय ने दी प्रतिक्रिया, कहा- भारत-चीन बॉर्डर इलाकों में स्थिति तब बिगड़ जाती है… राहुल गाँधी चंपत होकर चम्पा हो गए-बीजेपीराहुल गाँधी के सभी प्रयोग विफल रहे-सुधांशु त्रिवेदीराहुल गाँधी इस देश के लिए पहेली बने-बीजेपीभारत-चीन अरुणाचल प्रदेश बॉर्डर पर FACE OFF की स्तिथि , ITBP DG-शत्रुजीत कपूरउत्तरी सीमा को लेकर ITBP DG शत्रुजीत कपूर का बड़ा बयान, कई जगहों पर सेना आमने सामने, शौर्य प्लाटून ने बहुत अच्छा काम कियाअरुणांचल प्रदेश सीमा पर भारत चीन की सेना आमने सामने, face-off की स्थिति कई जगहों परतिब्बत में आया 7.0 तीव्रता का भूकंप, 16 लोगों की मौत, 46 घायल11 सीटों पर भाजपा-सपा के बीच टक्कर, जानें कौन दे सकता है वोटUP- SIR में गड़बड़ी से सियासी बवाल
Main slideअंतर्राष्ट्रीयअपराधअर्ली बिज़नेसई-पेपरउत्तर प्रदेशउत्तराखंडएजुकेशनऑटो वर्ल्डछत्तीसगढ़दिल्ली/एनसीआरबिहारमध्यप्रदेशमनोरंजनमहाराष्ट्रराजनीतिराजस्थानराज्यराष्ट्रीयस्पोर्ट्सहेल्थ

दिल्ली: खतरनाक परिस्थितियों में बंधुआ मजदूरी करने वाले 11 नाबालिग लड़कों को बचाया गया

जारी किए गए बंधुआ मजदूरों में एक आठ साल का बच्चा (प्रतीकात्मक फोटो) शामिल है

जारी किए गए बंधुआ मजदूरों में एक आठ साल का बच्चा (प्रतीकात्मक फोटो) शामिल है

दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) ने कहा कि खतरनाक परिस्थितियों में बाल श्रमिकों के रूप में काम करने वाले बच्चों की सूचना मिलने के बाद शुक्रवार को समईपुर बादली थाना क्षेत्र में सात स्थानों पर छापे मारे गए। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान ग्यारह बच्चों को बचाया गया

नई दिल्ली। उत्तरी दिल्ली के समयपुर बादली क्षेत्र में बंधुआ मजदूरी करने वाले ग्यारह लड़कों को बचाया गया है। बचाए गए लड़कों में एक आठ साल का बच्चा भी शामिल है। यह जानकारी एक बाल अधिकार संस्था ने रविवार को दी। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) ने कहा कि खतरनाक परिस्थितियों में बाल श्रमिकों के रूप में काम करने वाले बच्चों की सूचना मिलने के बाद शुक्रवार को समईपुर बादली थाना क्षेत्र में सात स्थानों पर छापे मारे गए। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान ग्यारह बच्चों को बचाया गया।

DCPCR ने अपने बयान में कहा, ‘ये बच्चे उत्तरी दिल्ली जिले के अलीपुर क्षेत्र में बेकरी इकाइयों, खराद मशीन इकाइयों और ऑटो केंद्र इकाइयों में बंधुआ मजदूर के रूप में खतरनाक परिस्थितियों में काम कर रहे थे। एक बच्चे को एक आवासीय स्थान से बचाया गया था जहाँ वह एक घरेलू सहायक (नौकर) के रूप में काम कर रहा था। उसने कहा कि बचाए गए बच्चों ने सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक आघात झेले हैं, खासकर कोविद -19 महामारी के समय।

आयोग ने कहा कि बचाए गए बच्चों को शहर के बाल देखभाल संस्थानों में भेज दिया गया है और उन्हें उनके परिवारों के साथ फिर से जोड़ा जाएगा। बाल अधिकार निकाय के अनुसार, 28 जनवरी को एक और बचाव अभियान में 51 नाबालिगों को बचाया गया, जिनमें से 10 लड़के थे और शेष 41 लड़कियां थीं। बचाव अभियान पश्चिम दिल्ली के नांगलोई इलाके में आरा मशीन, जूता और स्क्रैप इकाइयों में किया गया।

आयोग ने कहा कि दोनों बचाव कार्यों में, ज्यादातर मामलों में बच्चों को एक दिन में 12 घंटे से अधिक समय तक काम करते पाया गया और उन्हें प्रति दिन न्यूनतम 100-150 रुपये का भुगतान किया गया। बयान में कहा गया है, “इसके अलावा, ये बच्चे मास्क के बिना काम कर रहे थे और बहुत ही अस्वस्थ परिस्थितियों में काम कर रहे थे, विशेषकर महामारी के समय।” (भाषा से इनपुट)

Related Articles

Back to top button