Breaking
राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफ़ा2027 और 2029 की तैयारी में UP BJP, नीरज सिंह और पूजा पाल बने प्रदेश उपाध्यक्ष, हटे कई पुराने नामAyodhya Ram Mandir चढ़ावा कांड में एक्शन, SIT रिपोर्ट के आधार पर 8 आरोपी गिरफ्तारलखनऊ अग्निकांड में SIT को 7 दिन में CM योगी को देनी है रिपोर्टलखनऊ में जो हुआ वो सामान्य घटना नहीं- अखिलेशRam Mandir Donation Scam: SIT रिपोर्ट आई, कब होगी कार्रवाई? चढ़ावा चोरी पर UP सरकार के सामने क्या खुलासा हुआलखनऊ अग्निकांड में 15 छात्रों की गई जान जबकि 9 घायलभारत में दुनिया से एक दिन पहले रिलीज़ होगी टॉम हॉलैंड की ‘Spider-Man: Brand New Day’अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम समझौता तय, यूरोप में होंगे हस्ताक्षरइंडियन नेवी ने जहाज से निकाल लाई जिंदा मिसाइल, हादसे को टाला
Breaking Newsउत्तर प्रदेशराज्य

समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के गठबंधन परवान देने की कवायद पूरी |

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के चुनावी रेल पेल में हर तरफ गठजोड़ और पार्टी बंदी अपने चरम पर है यूपी में इस बार समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के एक साथ मिलकर लड़ने की उम्मीदों को परवान देने की कवायद चल रही है। हालांकि दोनों गठबंधन की घोषणा कर चुके हैं लेकिन अभी तक सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया है। इस सिलसिले में रालोद मुखिया जयंत चौधरी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मंगलवार को लखनऊ में मुलाकात की है और गठबंधन पर मंथन किया है। सपा प्रमुख अखिलेश ने रालोद मुखिया की फोटो को ट्वीट कर लिखा की जयंत चौधरी के साथ बदलाव की ओर। उधर जयंत चौधरी ने भी फोटो को ट्वीट करते हुए लिखा कि बढ़ते कदम। हालांकि अभी आधिकारिक रूप से दोनों पार्टियों की ओर से कोई सूचना नहीं मिली है। सूत्रों की मानें तो गठबन्धन की बात कुछ आगे बढ़ी है।

दरअसल सपा और रालोद के बीच मथुरा, बुलंदशहर और मुजफ्फरनगर आदि की कई विधानसभा सीटों पर मंथन चल रहा है। दोनों ही दलों के इन सीटों पर अपने-अपने दावे हैं। इन्हीं सब पर बात करने के लिए और गठबंधन को अंतिम रूप देने के लिए जयंत चौधरी लखनऊ पहुंचे हैं।

सूत्रों की मानें तो जयंत और अखिलेश के बीच एक और दौर की बातचीत होगी। इसके बाद दोनों नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन का ऐलान कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि सपा के करीब आधा दर्जन नेता आरएलडी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

रालोद के एक नेता ने बताया कि जयंत चौधरी अपना नफा- नुकसान देख कर ही कोई निर्णय लेंगे। क्योंकि चौधरी अजीत सिंह के निधन के बाद पार्टी की बागडोर उन्ही के कंधों पर है। वह हर कदम बड़ा फूंक-फूंक रख रहे हैं। अभी वर्तमान की राजनीतिक परिस्थितियों को भी भांप रहे हैं, क्योंकि कृषि कानून वापसी के बाद परिस्थितयां बदल रही है। इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। जो निर्णय होगा। बड़ा सधा होगा।

Related Articles

Back to top button