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ममता कुलकर्णी ने महामंडलेश्वर पद से दिया इस्तीफा

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

प्रयागराज। ममता के मराठी उच्चारण और धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने में असमर्थता के बावजूद, उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में कई भूमिकाएँ निभाईं, जिसकी शुरुआत 1992 में तिरंगा से हुई और उसके बाद करण अर्जुन, सबसे बड़ा खिलाड़ी, बाज़ी और 2002 में कभी तुम कभी हम की रिलीज़ तक। शर्मिला टैगोर के बेटे सैफ अली खान के साथ आशिक आवारा में भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर और लक्स से ‘न्यू फेस’ पुरस्कार मिला। अब ममता कुलकर्णी एक बार फिर से चर्चा में हैं। ममता कुलकर्णी को हाल ही में महामंडलेश्वर को ज्वाइंन किया था। विवाद बड़ा होने पर उन्हें पद से हटाने की पेशकश की गयी। अब नाराजगी के बाद ममता कुलकर्णी ने महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा दे दिया गया है।

सोमवार को बॉलीवुड अदाकारा ममता कुलकर्णी ने सोशल मीडिया पर नाराजगी के कुछ दिन बाद किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पद से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया। ऐसा लगता है कि इस अखाड़े के महामंडलेश्वर का पद ममता कुलकर्णी को दिए जाने को लेकर आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास के बीच विवाद के बाद यह इस्तीफा लंबे समय से लंबित था। अब ममता ने एक वीडियो शेयर कर महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा दे दिया है।

ममता ने वीडियो में कहा, “मैं महामंडलेश्वर ममता नंदगिरी इस पद से इस्तीफा देती हूं। दोनों समूहों के बीच जो लड़ाई चल रही है, वह ठीक नहीं है। मैं 25 साल से साध्वी हूं और मैं साध्वी ही रहूंगी। महामंडलेश्वर के रूप में मुझे जो सम्मान मिला, वह 25 साल तैराकी सीखने और फिर बच्चों को सिखाने जैसा था। लेकिन महामंडलेश्वर के रूप में मेरी नियुक्ति के बाद जो आक्रोश हुआ, वह अनावश्यक था। मैंने 25 साल पहले बॉलीवुड छोड़ दिया और फिर मैं गायब हो गई और हर चीज से दूर हो गई। मैं जो कुछ भी करती हूं, उस पर लोगों की बहुत ज्यादा प्रतिक्रियाएं होती हैं। मैंने देखा है कि बहुत से लोगों को मेरे महामंडलेश्वर बनने से परेशानी थी, चाहे वह शंकराचार्य हों या कोई और। मुझे किसी कैलाश या मानसरोवर जाने की जरूरत नहीं है, मेरे सामने पिछले 25 सालों की तपस्या के लिए ब्रह्मांड है।”

मामले में हंगामा बढ़ता देख ऋषि अजय दास ने अभिनेत्री ममता कुलकर्णी और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी दोनों को पद से हटा दिया। हालांकि, इसको लेकर भी मतभेद हैं। महामंडलेश्वर पद से हटाए जाने पर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा कि अजय दास मुझे अखाड़े से निकालने वाले कौन होते हैं, उन्हें तो 2017 में ही अखाड़े से निकाल दिया गया था।

 

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