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दो भारतीयों का अपहरण, बंदूक की नोक पर ले गए तालिबानी,एक को मिला फरार होने का मौका

काबुल: अफगानिस्‍तान की राजधानी काबुल से भारत के लिए बैड न्यूज आ रही है. अफगानिस्तान के काबुल पर जबसे तालिबानियों ने कब्जा किया है वहां के हालात सही नहीं है लोगों में डर और दहशत का माहौल बना हुआ है जिसके चलते लोग जल्द से जल्द अफगानिस्तान से निकलना चाहते हैं। ऐसे में एक 50 साल के कारोबारी व्यक्ति भी वहां से निकलना चाह रहे थे परंतु वे तालिबानियों के हत्थे चढ़ गये।

काबुल के कारते परवान इलाके से 50 साल के भारतीय बांसुरी लाल अलांदे को 5 लोगों ने बंदूक की नोंक पर अगवा कर लिया है.
बताया जा रहा है कि बांसुरी लाल का दवाईयों का गोदाम है और ये काबुल में ही है.
बासुरी लाल को मंगलवार को अगवा किया गया है. जो जानकारी आ रही है उसके मुताबिक जिस समय वो काबुल में अपने गोदाम से वापस आ रहे थे उसी समय रास्‍ते में उन्‍हें अगवा किया गया है. इंडियन वर्ल्‍ड फोरम के प्रेसीडेंट पुनीत सिंह चंडोक ने एक न्‍यूज चैनल के साथ बातचीत में यह दावा किया गया है. उन्‍होंने यह भी कहा है कि भारतीय स्‍टाफ के एक सदस्‍य को भी अगवा किया गया था मगर वो किसी तरह से भागने में कामयाब रहे. हालांकि इस सदस्‍य को बेदर्दी से पीटा गया है.
माना जा रहा है कि बांसुरी लाल को काबुल में किसी उगाही करने वाले गिरोह ने अगवा कर लिया है. हालांकि उनके परिवार को अभी तक फिरौती के लिए फोन कॉल का इंतजार है. विदेश मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो इस स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है. साथ ही साथ घटना की ज्‍यादा से ज्‍यादा जानकारी हासिल करने की कोशिशें जारी हैं. बांसुरी लाल का परिवार हरियाणा के फरीदाबाद में रहता है.
आपको बता दें कि 15 अगस्‍त को जब तालिबान ने काबुल पर कब्‍जा किया था तो उसके बाद से भारत ने यहां से 800 से ज्‍यादा लोगों को निकाला था. भारत ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ नाम दिया था. अफगानिस्‍तान में अभी कुछ भारतीय हैं. इनकी जल्‍द से जल्‍द वापसी और सुरक्षा का मसला कतर में भारतीय राजदूत दीपक मित्‍तल ने तालिबान के राजनीतिक ऑफिस के मुखिया शेर मोहम्‍मद स्‍टैनक्‍जाई के सामने 31 अगस्‍त को उठाया था. विदेश मंत्रालय की मानें तो तालिबान ने भारत की चिंताओं को दूर करने का भरोसा दिलाया है
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 16 अगस्‍त को एक के बाद एक कई ट्वीट किए और लिखा, ‘ काबुल में हालातों पर लगातार नजर रखी जा रही है. जो लोग भारत वापस आना चाहते हैं, उनकी चिंता और बेचैनी को भी समझा जा रहा है. मगर एयरपोर्ट ऑपरेशंस इस समय सबसे बड़ी चुनौती हैं. इस दिशा में अपने साथियों से लगातार चर्चा जारी है.’
उन्‍होंने बताया था कि काबुल में मौजूद सिख और हिंदु समुदायों के नेताओं के साथ भी संपर्क बनाया गया है. तालिबान लीडर्स ने भी देश में फंसे हिंदु और सिख आबादी के एक ग्रुप से मुलाकात की थी. तालिबान की तरफ से ने इन्‍हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया था. इस समय अफगानिस्‍तान में 300 सिखों और हिंदुओं ने काबुल के कारते परवान गुरुद्ववारे में शरण ली हुई है.
जब से तालिबान ने अफगानिस्‍तान पर कब्‍जा किया है तब से ही यहां पर स्थिति लगातार बेहाल है. राष्‍ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर जा चुके हैं. अमेरिका ने करीब 124,000 लोगों को निकाला है. पिछले हफ्ते कुछ फ्लाइट्स ने काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से टेकऑफ किया था और करीब 200 विदेशी नागरिकों को निकाला गया था. स्थिति के बाद से ही यहां पर बसे हिंदुओं और सिखों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार परेशान है.

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