Breaking
‘धुरंधर रॉ और अनदेखा’ देख भड़के दर्शक, बोले- ‘नया कुछ नहीं’रूस ने यूक्रेन युद्ध के लिए 217 भारतीयों को जबरदस्ती बनाया फौजी, 49 की मौतराष्ट्रपति भवन में पद्मा अवार्ड्स 2026 का आयोजन, दिग्गजों को मिला सम्मानगृह मंत्री परमेश्वर का ‘Cockroach Janta Party’ पर एक्शन, बोले- पुलिस का फैसला स्वतंत्रनेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई ‘Dhurandhar: Raw and Undekha’, जाने क्या है खासह्यूमन ट्रैफिकिंग पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 4 हफ्ते में AHTU बनाने को बोलापुलवामा हमले से जुड़ा आतंकवादी हमज़ा बुरहान पाकिस्तान में ढेर, हमलावरों ने गोलियों से किया छल्लीसीएम रेखा का ऐलान, दिल्ली में पानी-सीवर कनेक्शन सस्ताEarly News Hindi Daily E-Paper 20 May 2026वियतनाम के साथ रक्षा मंत्री की इमरजेंसी मीटिंग
उत्तर प्रदेशभक्ति पोस्टराज्य

आज भी मौजूद है कृष्ण की मौजूदगी का एहसास कराते घाट

सभी कृष्ण भक्तों के लिए जन्माष्टमी बहुत ही हर्ष और उल्लास का दिन होता है इस दिन सभी कृष्ण-कन्हैया भक्त अपने पूरे तन मन धन से कन्हैया की सेवा में जुटे रहते हैं। इस साल कृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त को है। हिंदू पंचांग के मुताबिक भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव भाद्रपद महीना और रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि इन्हीं नक्षत्रों में मनाया जाता है।

अष्टमी तिथि 29 अगस्त की रात 11 बजकर 30 मिनट बजे से शुरू होगी और 30 अगस्त की रात 1 बजकर 59 तक अष्टमी तिथि रहेगी। इसी वजह से इस साल 30 अगस्त यानी सोमवार को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

ज्योतिष शास्त्रियों के मुताबिक इस बार यानी 30 अगस्त को पड़ने वाली जन्माष्टमी का संयोग वैसा ही रहेगा जैसा द्वापर युग में भगवान कृष्ण के जन्म लेने पर हुआ था। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सोमवार को सुबह ही लग जाएगी जोकि रात के 2 बजे के बाद समाप्ति होगी। जयंती योग और रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है। इसके अलावा अष्टमी तिथि पर चंद्रमा वृषभ राशि में मौजूद रहेंगे।

मान्यता के मुताबिक भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मथुरा में जन्म हुआ था और वृंदावन में उनका लालन पालन हुआ था। आज भी मथुरा और वृंदावन के कण-कण में भगवान श्री कृष्ण का वास होता है।

आज भी यहां कई ऐसी जगह है जिसका संबंध द्वापर युग से है और ये भगवान कृष्ण से जुड़े हैं। ऐसी ही एक जगह है चीर घाट। चीर घाट आज भी कदंब के पेड़ को लेकर मशहूर है। मान्यता के मुताबिक आज भी यहां वह पेड़ मौजूद है जिसके बारे में कहा जाता है कि कन्हैया गोपियों के कपड़े चुरा कर इसी पेड़ पर छिप जाते थे।

चीर हरण लीला जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना में स्नान कर रही है महिलाओं के वस्त्रों को उठाकर एक पेड़ पर टांग दिया करते थे। बताया जाता है कि यहां मौजूद कदम्ब के पेड़ पर भगवान कृष्ण ने राक्षस के वध के बाद विश्राम किया था।

कहा जाता है कि ये स्थान पहले यमुना नदी के तट पर था। लेकिन वर्षो बाद, यमुना ने अपना रास्ता बदल दिया, अब चीर घाट यमुना से कुछ दूरी पर है। इस स्थान पर एक प्राचीन कदंब वृक्ष है जो अभी भी भगवान श्री कृष्ण के समय से विद्यमान है। वृंदावन के भक्त अब भी इस वृक्ष की पूजा करते हैं और यहां तक कि इस वृक्ष को प्रसाद भी चढ़ाते हैं।

Related Articles

Back to top button