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आज से जंतर-मंतर पर किसानो प्रदर्शन, आंदोलन में अब तक 537 किसानों की मौत

नई दिल्ली। बीते आठ महीनों से कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान संगठन अब 22 जुलाई से मानसून सत्र खत्म होने यानी 13 अगस्त तक रोज संसद के करीब जंतर मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे ‘किसान संसद’ का नाम दिया है।  दूसरी तरफ संसद में सरकार के जरिए दिए गए जवाब कि ‘किसान आंदोलन के दौरान हुई किसानों की मौत का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है’ की निंदा करते करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया है कि 10 जुलाई तक 537 किसान शहीद हो चुके हैं।

‘किसान संसद’ के लिए रोजाना करीब 200 प्रदर्शनकारी 5 बसों में बैठ कर सुबह सिंघु बॉर्डर से रवाना होंगे और जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर शाम 5 बजे वापसी करेंगे। प्रदर्शनकारी जत्थे

में देशभर के किसान संगठनों के प्रतिनिधि होंगे।  असामाजिक तत्वों को दूर रखने के लिए सभी प्रदर्शनकारियों को परिचय पत्र दिया जाएगा। निगरानी के लिए किसान संगठन के स्वयंसेवक भी रहेंगे।

सूत्रों के अनुसार संसद के पास प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस की तरफ से लिखित इजाजत नहीं मिली है।  पहले दिन के प्रदर्शन के लिए कल सुबह 8 से 9 बजे के बीच कजारिया टाइल्स, सिंघु बॉर्डर स्थित संयुक्त किसान मोर्चा के दफ्तर से किसानों का जत्था रवाना होगा।  संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि संसद के करीब पुलिस जहां इजाजत देगी, वहां हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करेंगे। 26 जनवरी के बवाल से सबक लेते हुए किसान संगठन पूरी एहतियात बरत रहे हैं। वहीं दिल्ली पुलिस समेत अन्य सुरक्षा बल भी किसानों के प्रदर्शन को लेकर चौकन्ने हैं।

आंदोलन के दौरान किसानों की हुई मौत के आंकड़े को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘यह शर्मनाक और खेदजनक बात है कि सरकार कह रही है कि आंदोलन के दौरान मारे गए आंदोलनकारी किसानों की संख्या का उसके पास कोई आंकड़ा नहीं है।  यह सच हो सकता है कि इस कठोर सरकार ने रिकॉर्ड नहीं रखा होगा।बीते 10 जुलाई तक 537 किसान शहीद हो चुके हैं।’ एक ब्लॉग साइट (humancostoffarmersprotest.blogspot.com) का पता साझा करते हुए मोर्चा ने कहा है कि इस पर सभी मृत किसानों की जानकारी उपलब्ध है।

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