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चीन,बना सरदर्द भारत समेत 22 देश चौंकन्ना, सीमा सुरक्षा में चाक चौबंद।

चीन से केवल भारत ही नही पूरी दुनिया को खतरा है. दुनिया के 22 देशों के साथ चीन का सीमा विवाद है , और जिनपिंग की नजर इन देशों की जमीन पर है. इससे भारत भी चौंकन्ना है और अपनी सीमाओं की सुरक्षा को हर दिन चाक चौबंद कर रहा है.
अब LAC और LoC पर 3 इंटीग्रेटेड एविएशन ब्रिगेड से निगरानी होगी. इंटीग्रेटेड एविएशन ब्रिगेड को आर्मी-एयरफोर्स के सर्विलांस से जोड़कर बनाया गया. كيف تلعب بلاك جاك आर्मी एविएशन के हेलिकॉप्टर और UAV को एयरफोर्स के उपकरणों के साथ मिलाया गया है.

इंटीग्रेटेड एविएशन ब्रिगेड से बेहतर सर्विलांस समेत मेंटिनेंस में भी आसानी होगी. एक ब्रिगेड ईस्टर्न कमांड (अरुणाचल प्रदेश ), दूसरी वेस्टर्न कमांड (जम्मू-राजस्थान) और तीसरी ब्रिगेड लेह में तैनात है. ब्रिगेड में हेरोन मार्क-1 A ड्रोन, ट्रांसपोर्टर हेलिकॉप्टर और अटैक हेलिकाप्टर्स शामिल हैं. इस ब्रिगेड में अपाचे, ध्रुव और रुद्र जैसे अटैक हेलिकॉप्टर भी शामिल किए जाएंगे.

चीन से निपटने के लिए भारत हर बॉर्डर पर बड़ी तैयारी कर रहा है. लेकिन आज ये पूरी दुनिया को समझने की जरूरत है कि विस्तारवादी चीन सिर्फ भारत के लिए ही खतरा नहीं है बल्कि सुपर पावर देशों के लिए भी सिरदर्द है और इसकी वजह हैं शी जिनपिंग और उनका कोर ग्रुप जिसके आगे अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA की एक नहीं चल रही.
अमेरिकी जासूसी एजेंसियों के लिए चीन हार्ड टारेगट बन गया है. एक टॉप सीक्रेट अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए जिनपिंग और चीन पहेली बन गया है. चीन की जासूसी में अमेरिका अब काफी हद तक साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ही निर्भर रह गया है. HUMAN इनपुट कम हो गया है. चीन में अमेरिकी जासूस बेहद कम बचे हैं. खुफिया रिपोर्ट में सामने आया है कि अमेरिका के पास चीनी भाषा मंडारिन बोलने वाले जासूसों की भारी कमी है. لعبة قمار بوكر

ऐसे में दुनिया में सबसे तेज तर्रार माने जाने वाले अमेरिकी जासूसों का दायरा सीमित हो गया है. CIA के एजेंटे जिनपिंग के सत्ता के गलियारों से भी अहम सूचनाएं नहीं जुटा पा रहे हैं. इस रिपोर्ट से एक बात साफ समझ में आती है कि चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के पैंतरों को भेद पाने में अमेरिकी एजेंसियां नाकाम साबित हो रही हैं. जबकि चीनी जासूसों ने अमेरिका पर अपनी पैठ बनाई हुई है.

यही वजह है कि बेखौफ चीन अब नई हड़पचाल की ओर बढ़ रहा हैं. चीन के निशाने पर साउथ चाइना सी में करीब 36 हजार वर्ग किलोमीटर का एक द्वीप देश भी है जिसे वो 71 साल से हड़पना चाहता है. 71 साल से वो मुल्क ड्रैगन की ज्यादतियों को सहता रहा है. अबतक सीधे-सीधे उलझने से भी बचता रहा है लेकिन चीन बार बार उसे धमकाता भी है और हड़पने की चाल भी चलता है.

नीले पानी पर दौड़ते विध्वंसक जहाज. आसमान में कतारों में बारूद बरसाने वाले लड़ाकू विमान और आक्रामाक अंदाज में युद्धाभ्यास. ये कहां हो रहा है…ये सिर्फ विस्तारवादी चीन को ही पता है. लेकिन दुनिया को इतना जरूर पता है कि ये वार एक्सरसाइज ताइवान की सीमा के पास PLA के फौजी कर रहे हैं और ये चीन की बेहिसाब बौखलाहट का ही नतीजा है.
अमेरिकी डेलिगेशन के ताइवान दौरे से चीन ने एक बार फिर अपना आपा खो दिया है और अमेरिका को खुलेआम धमकी दी है. ड्रैगन ने धमकी भरे लहजे में कहा है कि अमेरिका आग से खेल रहा है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेन बिन ने अमेरिकी दौरे को जोखिम भरा और उकसाने वाला बताया है. استراتيجية الروليت चीन का आरोप है कि अमेरिका ने वन-चाइना पॉलिसी का उल्लंघन किया है. अमेरिका ने भी दो टूक जवाब दिया है और कहा है कि USA अपनी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखकर दौरे कर रहा है.

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