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लखनऊ में स्मार्ट सिटी के जरिए खुलती विकास की पोल

लखनऊ मे 2 दिन की मूसलाधार बारिश ने ही स्मार्ट सिटी योजना की सारी पोल पट्टी खोल दी है स्मार्ट सिटी बनाने का दावा करने वाले जिम्मेदार कितनी जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं इसकी हकीकत बारिश ने सामने ला दी है। हालत यह है कि बारिश थमने के बाद शुक्रवार को एक तरफ धंसी सड़कों के गड्ढे भरवाए जा रहे थे तो दूसरी तरफ कई इलाकों से जगह-जगह सड़क धंसने के मामले भी सामने आ रहे थे। सड़कें तालाब बन चुके हैं और उन तालाबों के बीच में कहां गए मकान भी नजर आ रहे हैं
त्रिलोक नाथ रोड और भोपाल हाउस रोड पर धंसी सड़कें दो महीने पहले करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई थीं।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत नगर निगम की जो सड़कें खोदी गई हैं उनको जल निगम की वही ठेकेदार कंपनी केके स्पैन बनवा रही है जिसको सीवर लाइन बिछाने का ठेका मिला है। मानक अनुसार निर्माण सामग्री इस्तेमाल न किए जाने से दो महीने में ही सड़कें धंस जा रही हैं।
प्रेस क्लब के सामने और उसके बगल से फैमिली कोर्ट की तरफ जाने वाले वाली सड़क जगह-जगह धंस गई हैं। जल निगम के ठेकेदार को यह सड़क ठीक करानी थी, पर वह गायब रहा। इसके कारण नगर निगम के सहायक अभियंता सतीश रावत ने नगर आयुक्त के निर्देश पर सुबह जाकर गड्ढे को मलवा डलवाकर भरवाया।
त्रिलोक नाथ रोड पर करीब दो महीने पहले जल निगम के ठेकेदार ने सड़के कटे हिस्से को बनाया था, मगर वह तब से कई बार धंस चुका है। इस पर सुरक्षा के लिहाज से नगर निगम ने मरम्मत की। शुक्रवार को सड़क फिर कई जगह धंस गई। वहीं, त्रिलोक नाथ रोड से लगी भोपाल हाउस के अंदर जाने वाली सड़क भी जगह-जगह धंस गई। (पुराना हाईकोर्ट से डीएम कार्यालय तक सड़क में कई जगह गड्ढे हो गए हैं।
लालबाग में एलडीए के पुराने ऑफिस के पास भी सीवर लाइन का काम हुआ है। यहां दो महीने पहले बनी सड़क भी कई जगह धंस गई है। इसी तरह कैसरबाग में बलरामपुर अस्पताल व बस स्टैंड वाली रोड भी बैठ गई। निशात हॉस्पिटल से कैपर रोड की ओर जाने वाली सड़क एक महीने पहले ही बनाई गई है, पर इस आधी सड़क की बजरी उखड़ गई है। (बीएच पार्क के पास सड़क के धंसने से गड्ढा हो गया)
चिनहट तिराहे के पास भी शुक्रवार को सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया। सड़क का जो हिस्सा धंसा है, वहां सीवर लाइन का मैनहोल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि काम सही से किया गया होता तो ऐसा नहीं होता। सड़क को जल्द बनाया जाए।
प्रोजेक्ट मैनेजर, पीयूष मौर्या का कहना है कि ज्यादातर जगह सड़क वहीं पर धंसी हैं जहां मैनहोल है। सीवर के इस तरह के काम में जब अधिक बारिश होती है तो पानी जाने पर सड़क बैठ जाती है। जिस ठेकेदार ने सड़क बनाई है उसे ही दो साल तक मरम्मत भी करनी है। घटिया निर्माण की बात नहीं है। नई लाइन बिछाने में ज्यादातर बारिश होने पर सड़क खराब हो जाती है। प्रेस क्लब के पास धंसी सड़क में दो जगह और गड्ढे हो गए।)

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