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उत्तर प्रदेश

केंद्र सरकार ने यूपी को छह लाख मीट्रिक टन डीएपी कराई मुहय्या,खाद संकट होगा दूर।

उत्तर प्रदेश: प्रदेश भर में गहराए खाद संकट का बहुत जल्द निवारण होगा । खासतौर से डीएपी की कमी को लेकर किसानों ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से शिकायतें की थी ।मिल रही इन शिकायतों पर केंद्र सरकार ने लगाम लगाने की तैयारी कर ली है । केंद्र सरकार ने यूपी के लिए छह लाख मीट्रिक टन से अधिक डीएपी का आवंटन किया है।
,किसानों को यह डीएपी इसी नवंबर में मिलने की उम्मीद बताई जा रही है । आगामी एक सप्ताह में इस समस्या का निदान हो जाने की उम्मीद है। इसके अलावा यूपी सहित अन्य राज्यों को खाद और यूरिया भी आवंटित की गई है।

रबी की फसल की बुवाई शुरू हो चुकी है। यह सिलसिला करीब 15 से 20 दिसंबर तक चलेगा। ऐसे में डीएपी की कमी से किसानों में बेचैनी थी। खाद की कमी की मामले जैसे ही प्रदेश के कुछ हिस्सों से सुनाई देने लगे तो तमाम लोगों ने इसका स्टॉक करना शुरू कर दिया। खाद की किल्लत की सबसे ज्यादा शिकायत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों खासकर आलू उत्पादन वाली बेल्ट में और बुंदेलखंड की दलहन वाली बेल्ट से आ रही थी। स्टॉक और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्य सरकार ने हाल ही में किसानों को उनकी जोत बही के अनुसार ही खाद के आवंटन का निर्देश दिया था। इसके अलावा सभी मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को लगातार चेकिंग और अधिकारियों की देखरेख में खाद वितरण कराने को भी कहा गया था।
अक्तूबर के महीने में खाद किल्लत के मामले गूंजते रहे। एक अनुमान के मुताबिक उपलब्धता और मांग के बीच तकरीबन आठ लाख मीट्रिक टन का अंतर हो गया था। अब केंद्र सरकार द्वारा यूपी को छह लाख मीट्रिक टन डीएपी के आवंटन से यह संकट दूर हो जाएगा।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव जल्द होने हैं। ऐसे में खाद को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई थी। खाद की कमी को लेकर प्रमुख विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। बसपा अध्यक्ष मायावती हों या सपा मुखिया अखिलेश यादव दोनों ने खाद की कमी का मुद्दा उठाया था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा तो ललितपुर के उस किसान के घर भी गई थीं, जिसकी मौत का कारण खाद की लाइन में लगातार खड़े रहना बताया गया था। रालोद ने भी पश्चिमी यूपी में इसे मुद्दा बनाना शुरू कर दिया था। सरकार भी इसे लेकर चौकन्नी थी। खाद के आवंटन से अब इसे लेकर राजनीति का सिलसिला थम जाएगा।

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