Breaking
रजनीकांत-कमल हासन को लॉन्च करने वाले पद्मश्री विजेता डायरेक्टर भरतहिराजा का निधनजम्मू-कश्मीर: उरी सेक्टर में ग्रेनेड फटने से सेना के दो जवान शहीदअब दुश्मनो की खैर नहीं, भारत ने तैनात किए 12 परमाणु बमफिलीपीन्स में आया 7.8 तीव्रता का भूकंप, तटीय इलाकों में उठीं सुनामीINDIA Bloc मीटिंग में खरगे का मोदी सरकार पर हमला, विदेश नीति से लेकर SIR तक उठाए आरोपRealme P4R आगमन, 8000mAh बैटरी से मचाएगा तहलका, जानें फीचर्सटॉम क्रूज के को-स्टार जेम्स हैंडी की हत्या, गर्लफ्रेंड का बेटा कातिलरूस ने भारत को दिया 5वीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट का ऑफरकॉकरोच जनता पार्टी की पहली रैली में भारी भीड़, राजनेताओं की उड़ी नींदकुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन अटैक, एक भारतीय की मौत
अर्ली बिज़नेसउत्तर प्रदेशराज्य

नैनो उर्वरकों से उत्पादन बढ़ेगा और लागत घटेगी : सचिन प्रताप सिंह

वैज्ञानिकों ने जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर दिया बल

भारतेन्दु शुक्ल

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

सीतापुर। कृषि में आधुनिक तकनीक और संसाधन दक्षता बढ़ाने की दिशा में, इफको द्वारा नैनो उर्वरक उपयोग महा अभियान के अंतर्गत किसान दिवस कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र–II, कटिया, जनपद सीतापुर में किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और नैनो उर्वरकों के उपयोग, उनके प्रभाव तथा लागत में कमी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की गईं।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इफको सीतापुर के क्षेत्रीय अधिकारी सचिन प्रताप सिंह ने कहा कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से किसानों की उत्पादन लागत में कमी आएगी और फसल की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। श्री सिंह ने बताया कि नैनो DAP का उपयोग कर किसान पारंपरिक दानेदार DAP की मात्रा को आधा कर सकते हैं। बीज, कंद या जड़ उपचार के लिए प्रति किलोग्राम बीज पर 5 मिलीलीटर नैनो DAP का प्रयोग करें तथा फसल में 30–35 दिन बाद नैनो DAP का छिड़काव करें। इससे फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा और उर्वरक की बचत होगी।

उन्होंने किसानों को जैविक खेती अपनाने और इफको द्वारा चलाए जा रहे नैनो उर्वरक उपयोग जागरूकता अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने सागरिका, जल विलेय उर्वरक, नैनो जिंक और नैनो कॉपर जैसे उत्पादों की जानकारी दी, जिनके प्रयोग से किसान अपनी खेती की लागत को और कम कर सकते हैं।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, कटिया, के वैज्ञानिक सचिन प्रताप तोमर ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में बताया और किसानों को इनकी मात्रा घटाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अधिक यूरिया प्रयोग से कीट व रोगों का प्रकोप बढ़ता है और उत्पादन घटता है।

शैलेंद्र सिंह, प्रसार वैज्ञानिक ने किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी, वहीं डॉ. आनंद सिंह ने पशुपालन एवं पशुओं की देखभाल से संबंधित उपयोगी जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र में लगाए गए नैनो उर्वरक प्रदर्शन प्लॉट का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और नैनो उर्वरकों के लाभों को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

इस अवसर पर विमल कुमार वर्मा (SFA), रंजीत कुमार सहित लगभग 70 किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह, फार्म मैनेजर, कृषि विज्ञान केंद्र–II, कटिया, सीतापुर द्वारा किया गया।

Related Articles

Back to top button