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अर्ली बिज़नेसउत्तर प्रदेशराज्य

नही मिला पिछला बकाया, नये सत्र में गन्ना तैयार,किसानों की हालत दयनीय ।

गोरखपुर, किसानों की समस्याओं पर मूक बधिर बनी सरकार, मिल प्रबंधन व प्रशासन झाड रहे पल्‍ला महराजगंज के निचलौल स्थानीय तहसील क्षेत्र के गड़ौरा में स्थित जेएचवी चीनी मिल में गन्ना देने वाले किसानों का बकाया भुगतान नहीं हो सका है।जबकि नए सत्र की पेराई शुरू होने वाली है। शासन को दिए रिपोर्ट के अनुसार मिल ने केवल सत्र 2020- 21 का करीब 16 करोड़ रुपया बकाया बताया है। मिल वर्ष 2014 से लेकर 2017 तक पूर्ण भुगतान का दावा कर रहा है। जबकि कुछ किसान अभी भी जिला गन्ना अधिकारी के पास भुगतान के लिए फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं। ऐसे में किसान असमंजस में हैं कि उनके बकाए भुगतान का क्या होगा?
मिश्रौलिया गांव के किसान सुदामा पासवान ने बताया कि गन्ना किसानों की हालत वर्तमान में दयनीय हो चुकी है। पहले कोरोना ने पीड़ित किया। किसी तरह अपने फसल को किसानों ने मिल तक पहुंचाया था। उम्मीद थी कि जल्दी ही भुगतान होगा तो स्थिति में सुधार होगा, लेकिन अभी तक 60 हजार रुपये का भुगतान नहीं हुआ। जिससे आगे किस मिल को गन्ना दिया जाए इसके लिए भी असमंजस है।
बहुआर गांव के किसान इंद्रजीत यादव ने बताया कि गड़ौरा चीनी मिल केवल सत्र 2020 का बकाया बता रहा है। जबकि क्षेत्र में कई किसानों का पुराना बकाया भी है। पिछले साल गिराए गए गन्ने का एक लाख रुपये का भुगतान नहीं होने से खेत में खड़े गन्ने की कटाई व ढुलाई के लिए कर्ज लेना पड़ेगा। जिसके बाद ही गन्ना मिल तक भेज सकेंगे।
किसानों ने बताया की गड़ौरा मिल में गिराए गए गन्ने का कुल मूल्य 50 हजार रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। जबकि भाठ क्षेत्र में सभी कार्य गन्ने के पैसे से ही होता है। मिल प्रबंधन व प्रशासन एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। वर्तमान सत्र का भुगतान मिल चलने से पहले कर देना चाहिए।
मिश्रौलिया के सिताबी अली ने बताया कि शासन का वादा था कि गन्ना मूल्य का भुगतान एक माह के भीतर कर दिया जाएगा। जिसके कारण सभी किसान आश्वस्त थे। इसके बाद भी पिछले वर्ष गिराए गए गन्ने का मूल्य 80 हजार रुपये अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है। जिससे खेती करने व परिवार का खर्च चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है
जिला गन्‍ना अधिकारी जगदीश यादव ने बताया कि गड़ौरा चीनी मिल पर किसानों के बकाए के लिए कई बार मिल प्रबंधन को निर्देशित किया जा चुका है। इसके बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। मिल पर वर्ष 2020-21 का लगभग 16 करोड़ रुपये बकाया है। वर्ष 2014 से 2017 तक पूर्ण भुगतान की बात पर मिल से सूचना मांगी गई है।

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