ला फिड्युसी ने मोहनलालगंज में लोगों को बाटें कपड़े
सामुदायिक कल्याण पहल के तहत 300 से अधिक लाभार्थियों को वितरित किए गए कपड़े

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।
लखनऊ । सामाजिक कल्याण, सामुदायिक सेवा तथा बेसहारा एवं आवारा पशुओं की देखभाल के क्षेत्र में सक्रिय गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ला फिड्युसी ने लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र स्थित परवर पूरब ग्राम सभा के ससीरन सपेरा बस्ती में पुराने कपड़ों के वितरण अभियान का आयोजन किया। इस वितरण अभियान के दौरान स्थानीय समुदाय के 300 से अधिक लाभार्थियों को कपड़े वितरित किए गए।
कपड़े प्राप्त करने वाले लाभार्थियों ने ला फिड्युसी द्वारा किए गए इस सहयोग के लिए खुशी व्यक्त करते हुए संस्था के प्रति आभार जताया।
कार्यक्रम का नेतृत्व ला फिड्युसी के अध्यक्ष श्री यश सेंगर ने किया। इस अवसर पर ला फिड्युसी के अध्यक्ष यश सेंगर ने कहा, “ला फिड्युसी का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के साथ खड़ा होकर उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाए। हमारा उद्देश्य केवल जरूरतमंद लोगों को सामग्री उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील, जिम्मेदार और समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देना भी है।”
उन्होंने कहा कि संस्था जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए नियमित रूप से विभिन्न सामाजिक कल्याण गतिविधियों का आयोजन करती है। इनमें भोजन पैकेट वितरण अभियान, विद्यार्थियों के बीच पुस्तकों एवं स्टेशनरी का वितरण तथा रक्तदान शिविर प्रमुख हैं। इन पहलों का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना और सामुदायिक स्तर पर सहयोग की भावना को मजबूत करना है।
इसी क्रम में, ला फिड्युसी ने जुलाई 2026 में लखनऊ के मेदांता अस्पताल में रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया था। संस्था के सभी स्वयंसेवकों ने शिविर में सक्रिय रूप से भाग लिया और मरीजों की सहायता के लिए स्वेच्छा से रक्तदान किया। इस पहल का विशेष उद्देश्य जरूरतमंद एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से संबंधित मरीजों को सहायता प्रदान करना था।
यश सेंगर ने आगे कहा कि ला फिड्युसी आवारा कुत्तों एवं अन्य पशुओं के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। संस्था विभिन्न पहलों के माध्यम से जिम्मेदार पालतू पशु देखभाल तथा पशुओं के प्रति मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करती है।
ला फिड्युसी का उद्देश्य सामाजिक सेवा, सामुदायिक सहयोग और पशु कल्याण के माध्यम से समाज के जरूरतमंद वर्गों तक सहायता पहुंचाना तथा एक अधिक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण में अपना योगदान देना है।








