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दागदार को कैसे राजदार बनाता है तंत्र जानिए यह मंत्र

गाजियाबाद के इन्फ्राट्रक्चर को लेकर कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा है। समस्त सरकारी व गैर सरकारी संस्थाएं इन्फ्राट्रक्चर को ध्वस्त होने से बचाने में जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी हैं।

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क 
गाज़ियाबाद से श्यामल मुखर्जी की रिपोर्ट 
गाजियाबाद। गाजियाबाद के इन्फ्राट्रक्चर को लेकर कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा है। समस्त सरकारी व गैर सरकारी संस्थाएं    इन्फ्राट्रक्चर को ध्वस्त होने से बचाने में जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी हैं। ऐसी सोच से ही दागदार अफसरों को अवसर प्राप्त होते रहते हैं। यूं तो सर्वत्र गाजियाबाद में अवैध निर्माणों तथा सरकारी भूमि को हड़पने की होड़ मची हुई है। चाहे वह प्रताप विहार के चरण सिंह कॉलोनी का मसला हो या नेहरू नगर के पार्क पर अवैध कब्जा कर निर्माण किए जाने का या मोहन नगर स्थित यूपीएसआईडीसी के भूमि पर बसी राजीव कॉलोनी का या शिब्बन पुरा स्थित जीडीए द्वारा अर्जित भूमि पर बसे गुरुद्वारे के आसपास के क्षेत्र का या कैला भट्टा व साईं उपवन के बीच सरकारी भूमि पर बसी अमन कॉलोनी चमन कॉलोनी गुलजार कॉलोनी का। ऐसे अनगिनत उदाहरण गाजियाबाद में सरेआम देखने को मिल जाएंगे। इन सब में अवैध निर्माण कराने में सहयोग सरकारी अभियंताओं, अधिकारियों का निसंदेह रहता है।
बगैर इनकी शह के एक पत्ता भी   हिलना संभव नहीं  है। जीडीए के प्रवर्तन 4 में जॉन प्रभारी व उनके अधीनस्थों की मेहनत देखिए कि किस प्रकार नवरंग सिनेमा के बराबर तथा जज आवासों की जड़ में सौ प्रतिशत बेसमेंट बनवा कर भूखंड को तीन हिस्सों में ब॔टवा कर व्यवसायिक निर्माण किए जा रहे हैं। जजों की सुरक्षा का भी ध्यान नहीं कि कोई अपराधिक तत्व मुकदमे के फैसले से असंतुष्ट होकर गलत कदम ना उठा दे इसका भी तनिक ध्यान नहीं रखा गया तथा मल्टीस्टोरी का निर्माण बदस्तूर जारी है। ऐसा ही शास्त्री नगर के सी व डी ब्लॉक के बीच वाली रोड पर दाहिनी ओर के पहले भूखंड पर आवासीय पर व्यवसायिक चार मंजिला बेसमेंट सहित निर्माण कराकर सहयोग किया जा रहा है। शहर के व्यस्ततम चौपला पर दुकानों का निर्माण जारी है। रमते राम रोड पर पुराने मोहन चित्रलोक सिनेमा (अब कमर्शियल कंपलेक्स) के बराबर वाली भूमि पर कमर्शियल बिल्डिंग बनवा ही दी गई है। महिंद्रा एंक्लेव में जगह-जगह बगैर नक्शों के निर्माण बदस्तूर जारी है। यहां बताते हैं कि चाह कर भी नक्शे पास नहीं हो सकते क्योंकि पूरी कॉलोनी ही अवैध है। इन निर्माणों की सूचना ऐसा नहीं है कि जागरूक जनता द्वारा आयुक्त मेरठ मंडल व उपाध्यक्ष गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को उनके व्हाट्सएप नंबर पर न दी गई हो बल्कि कई बार दी जा चुकी है लेकिन जब उच्च अधिकारियों का डर व खौफ ही न हो तो दिक्कत काहे की। नेहरू नगर जैसे पाॅश इलाके में अभियंता अशोक अरोड़ा का तो जवाब ही नहीं बगैर नक्शे सरेआम निर्माण कराया जाना बगैर जॉन प्रभारी के आशीर्वाद से व मिलीभगत के संभव ही नहीं। अशोक अरोड़ा व योगेश पटेल उच्च अधिकारियों को कैसे संतुष्ट करते होंगे यह विचारणीय हैं। आयुक्त व उपाध्यक्ष तक को सूचित करने के बाद भी निर्माण का हो जाना ही अपने में बड़ा कौशल है। प्रवर्तन जोन चार के प्रभारी के बारे में सर्वत्र चर्चा है कि वह “सबका साथ सबका विकास” के अनुपालन में संतोषी व्यक्तित्व के धनी हैं। अब गाजियाबाद का इन्फ्राट्रक्चर जाए भाड़ में। अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता। जब अब तक चली है आगे भी चलेगी बस ऊपर वालों की निगाहें करम रहना चाहिए।
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