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राजा भैया की बढ़ सकती हैं मुश्किलें,कुंडा और बाबागंज सीटों पर सपा लगा रही दाँव।

लखनऊ : पिछले 15 सालों से समाजवादी पार्टी कुंडा और बाबागंज सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारती थी, लेकिन इस बार इन दोनों सीटों पर वो अपने उम्मीदवार उतारने जा रही है।यूपी चुनाव में पिछले चुनावों तक बाहुबली नेता राजा भैया के साथ दोस्ती निभाने वाले अखिलेश यादव इस बार के चुनाव में उनके खिलाफ भी प्रत्याशी उतारने जा रहे हैं। जनसत्ता दल के प्रमुख राजा भैया कभी सपा सरकार में मंत्री हुआ करते थे। कुंडा सीट से रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया सात बार विधायक रह चुके हैं। जिसमें सपा का समर्थन उनके लिए महत्वपूर्ण रहा है। कई बार राजा भैया को मुसीबत से निकालने का श्रेय सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव को जाता है। लेकिन सपा-बसपा गठबंधन ने उन्हें मुलायम परिवार से दूर कर दिया।

दरअसल राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग के दौरान अखिलेश के कहने के बाद भी राजा भैया ने बसपा छोड़ भाजपा को वोट दे दिया था। बस फिर क्या था अखिलेश, कुंडा विधायक से खफा हो गए और समाजवादी पार्टी के दरवाजे राजा भैया के लिए हमेशा के लिए बंद हो गए। एक बार फिर जब 2022 विधानसभा चुनाव नजदीक है तो अटकलें लगाई जा रही थी कि सपा, राजा भैया को सपोर्ट कर सकती है। शायद राजा भैया को भी यही उम्मीद हो, लेकिन सपा ने साफ कर दिया कि वो राजा भैया के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगी।
कुंडा और बाबागंज सीट पर राजा भैया का हमेशा से दबदबा रहा है। सपा पिछले तीन चुनावों में इन सीटों पर राजा भैया के साथ थी। कुंडा से जहां राजा भैया खुद लड़ते है, वहीं बाबागंज सीट पर सपा ने विनोद सरोज को समर्थन दिया था। लेकिन राज्यसभा चुनाव में हार के बाद अखिलेश ने इन दोनों ही सीटों पर काफी पहले से नजरें गड़ा दी थीं।
दोनों की सीटों पर सपा काफी पहले से बूथ स्तर पर काम कर रही है। हर बार इन सीटों पर बसपा से राजा भैया को चुनौती मिलती रही थी, लेकिन इस बार सपा के मैदान में उतरने से राजा भैया के लिए इन दोनों ही सीटों पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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