Breaking
FBI की हैरान करने वाली रिपोर्ट, क्या अमेरिका में घुसकर मारेगा ईरान?HPCL के प्लांट में डबल मर्डर, पुलिस ने आरोपी के दोनों टांगों में मारा गोलीEarly News Hindi Daily E-Paper 13 March 2026Opposition के ‘Mic Off’ के आरोप पर स्पीकर ओम बिरला का पलटवार, कहा- मेरे पास कोई बटन नहीं हैदेश के कई शहरों में होटल रेस्ट्रोरेंट और ढाबे बंददेश भर में एलपीजी घरेलू सिलेंडर की किल्लत, जबकि कमर्शियल सिलेंडर मिलना बंदCM धामी- अग्निवीर को 10% रिजर्वेशन देकर सुरक्षित करेंगे भविष्यईरान के मिसाइल हमले हुए कम, क्या है तेहरान की नई रणनीति?नहीं बढ़ेगा LPG गैस का दाम? सरकारी सूत्रों ने कहा- देश में पर्याप्त स्टॉकबुकिंग में आ रही है समस्या, कई जगह गैस वेंडर नहीं उठा रहे फ़ोन
उत्तर प्रदेशराज्य

“पोषण माह” पर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा पोषण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

सीतापुर। पोषण माह के अंतर्गत कटिया गाँव में कृषि विज्ञान केंद्र-2, कटिया द्वारा एक विशेष पोषण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय में समग्र पोषण सुरक्षा, कुपोषण उन्मूलन, तथा स्थानीय संसाधनों के माध्यम से संतुलित आहार के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र-2, सीतापुर द्वारा की गई। उन्होंने अपने उद्बोधन में ग्रामीण क्षेत्र में पोषण शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि पोषण केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समग्र जीवनशैली का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कुपोषण से लड़ने के लिए हमें स्थानीय कृषि प्रणाली, पारंपरिक खाद्य पदार्थों, और पोषण वाटिकाओं को अपनाना होगा। डॉ. श्रीवास्तव ने यह भी सुझाव दिया कि हर विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र में पोषण वाटिका की स्थापना कर बच्चों को पौष्टिक सब्जियों से जोड़ना चाहिए, जिससे वे बचपन से ही संतुलित आहार की आदतें सीख सकें।

कार्यक्रम में केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. रीमा, डॉ. शिशिर कांत सिंह, डॉ. शैलेन्द्र सिंह एवं डॉ. शुभम सिंह राठौड़ द्वारा विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिक व्याख्यान दिए गए। डॉ. रीमा ने पोषक तत्वों की आवश्यकता एवं उनके स्त्रोत, आहार विविधता (Dietary Diversity), सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients), एवं महिलाओं और किशोरियों में आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. शिशिर कांत सिंह ने कुपोषण से बचाव के लिए पौष्टिक आहार एवं स्थानीय खाद्य संसाधनों के प्रयोग पर बल दिया।

Related Articles

Back to top button