Breaking
भाजपा की लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ पदयात्रा में उमड़ा जनसैलाब, जाम से आम जनता हलकानवाराणसी के एक दिवसीय दौरे पर अखिलेश, बोले- भाजपा ही अराजकता हैग्लेंन मैक्सवेल ने 14 साल के सफर का किया अंत, इंटरनेशनल क्रिकेट से लिया संन्यासदुनिया भर में जेलर 2 ने 810 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया, अन्य फिल्मों की कमाई धीमीदिल्ली में औसत AQI 331 पहुंचा, जहांगीरपुरी समेत कई इलाके गंभीर श्रेणी मेंनेपाल में लैंडिंग के दौरान दो हेलीकॉप्टर आपस में टकराए, विदेशी पर्यटक की मौतसमाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के लिए श्राप है- योगीAAP छोड़ने वाले 3 विधायक बीजेपी में शामिलUP वाले विदाई अच्छे से करते हैं- अखिलेश यादवउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रकोष्ठ संकुल की बड़ी भूमिका होगी- वीडी शर्मा
लेख

वासनाओं से रिक्त मन में दिव्य तेज स्वतः उत्पन्न हो जाता है : स्वामी चिन्मयानंद

स्वामी चिन्मयानंद जी कहते हैं कि वह दृढ़ ध्यानी जो अपने मन को विषय-वस्तुओं में और नहीं भटकाता है और जिस व्यक्ति का सर्वोच्च लक्ष्य केवल ‘‘मैं’’ ही हूँ, वह वास्तव में ‘‘मैं‘‘ बन जाता है।

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क 

लखनऊ। हम अपने आस-पास की दुनिया पर प्रभाव डाले बिना एक दिन भी नहीं जी सकते हैं और हमारे पास एक विकल्प है कि हम किस तरह का प्रभाव डालते हैं। आज हम सभी बच्चों के लिए प्रार्थना करते हैं। हो सकता है कि उन्हें अभी भी मुस्कुराने के लिए कुछ मिल जाए और वो आभारी रहें।

स्वामी चिन्मयानंद जी कहते हैं कि वह दृढ़ ध्यानी जो अपने मन को विषय-वस्तुओं में और नहीं भटकाता है और जिस व्यक्ति का सर्वोच्च लक्ष्य केवल ‘‘मैं’’ ही हूँ, वह वास्तव में ‘‘मैं‘‘ बन जाता है। शास्त्रों का वचन है कि अपने आप को खाली करो और मैं तुम्हें भर दूंगा। अपने वासनाओं को खाली कर दो, उस खाली मन में दिव्य तेज स्वतः उत्पन्न हो जाता है। उसके बाद तुममे और मुझमें कोई भेद नहीं रह गया।

भगवान कहते हैं कि आत्मस्वरूप का ज्ञान या मुक्ति प्राप्त करने में कई जीवन लगते हैं – ‘‘बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते’’। कोई इसे कैसे समझता और व्याख्या करता है यह उसके आंतरिक व्यक्तित्व पर निर्भर करता है। आध्यात्मिक साधक हमेशा आशावादी रहेगा कि यह ही अंतिम जीवन है, यह हजारों साल बाद क्यों होना चाहिए? हर बार जब आप ध्यान के लिए बैठते हैं तो पूरे विश्वास के साथ जायें क्योंकि मुझे नहीं पता कि यह कब हो सकता है। ‘‘बहूनां जन्मनामन्ते’’ अथवा कई जन्मों की अवधारणा हमें महत्व और आशा देती है कि यह मात्र संयोग नहीं है कि हम आज यहां हैं, बल्कि पौधों से प्रारम्भ करके जानवरों, वानरों और फिर इंसानों तक खरबों वर्षों में विकसित हुए हैं और अब यहां से मुझे उच्च तक पहुंचना है। जब यह समझ आती है तो आपकी आध्यात्मिक प्यास की खोज अधिक सार्थक और फलदायी हो जाती है, जिसके अच्छे परिणाम मिलते हैं।

भगवान यह कहते हैं जब एक व्यक्ति मेरी चेतना के स्तर पर जागता है तो अचानक महसूस करता है कि यह जगत कुछ नहीं बल्कि केवल दिव्य वैभवपूर्ण चेतना है। स्वप्नदृष्टा को यह एहसास होता है कि मैंने जो संपूर्ण ब्रह्मांड स्वप्न देखा है, वह जाग्रत मन, शुद्ध चेतना ‘‘वासुदेवः सर्वमिति’’के अतिरिक्त कुछ नहीं है। पहले जब मैं शरीर, मन और बुद्धि तक सीमित था तो मुझे लगा कि दुनिया केवल एक बहुलवादी घटना है, लेकिन अब मुझे एहसास हुआ कि यह ‘अनंत चेतना के अलावा और कुछ नहीं है।

ऐसी महान आत्मा जिसने अपने भीतर के परमात्मा के साथ एकत्व का अनुभव कर लिया है, उसे पाना बहुत कठिन है ‘‘महात्मा सुदुर्लभः’’ – यह इतना दुर्लभ क्यों है – इच्छाओं के साथ हमारी व्यस्तता के कारण विवेकपूर्ण शक्ति विकृत हो जाती है। उस अज्ञानता में हम सुखों के पीछे दौड़ते हैं अतः हमारा सारा बौद्धिक ध्यान नष्ट हो जाता है। ईश्वर के स्थान पर हम वस्तुओं और सांसारिक लाभ के लिए अन्य अलौकिक शक्तियों का आह्वान करने लगते हैं।

आज के ज्ञान यज्ञ के प्रारंभ में विद्या भारती चिन्मय विद्यालय जमशेदपुर झारखण्ड के छात्रों ने गुरूदेव को समर्पित संस्कृत स्तुति प्रस्तुत की और वेदांत पाठ्यक्रम बैच – 18 के साधकों द्वारा अध्याय 7 भगवत गीता के श्लोकों का गायन किया गया। साथ ही चिन्मय विश्वविद्यापीठ, चेन्नई का एक परिचयात्मक वीडियो भी दिखाया गया।
यह ऑनलाइन वीडियो गीता ज्ञान यज्ञ यूट्यूब के चिन्मय चैनल पर 25 मई, 2021 तक प्रतिदिन शाम 7ः15 बजे से उपलब्ध रहेगा।

Related Articles

Back to top button