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एक डिवाइस ने कैसे पूरे ईरानी सैनिकों को छकाया ? पलक झपकते ही हो गया दुनिया का सबसे हैरतअंगेज रेस्क्यू

पायलट ने तुरंत इजेक्ट किया और अपनी जान बचाने के लिए पहाड़ी इलाकों की तरह भाग गया। बताया जाता है कि वो करीब 7000 फीट की ऊंचाई तक पहाड़ चढ़ गया और एक सककरी दरार में छिप कर बैठ गया। जहां से उसे ढूंढ पाना लगभग नामुमकिन था। लेकिन यहीं से शुरू हुआ हाईटेक रेस्क्यू मिशन।

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

अंतर्राष्ट्रीय

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच एक ऐसा ऑपरेशन सामने आया है जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। दुश्मन देश की सरज, ऊंचे पहाड़, चारों तरफ खतरा और बीच में फंसा एक जख्मी पायलट। लेकिन इसके बाद जो हुआ वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। यूनाइटेड स्टेट ने युद्ध के बीच ईरान की धरती पर अपने पायलट को जिंदा वापस निकाल लिया। दो दिन तक पहाड़ों में छिपे उस पायलट को बचाने के लिए आसमान में दर्जनों फाइटर जेट्स गस्त कर रहे थे। लेकिन इस मिशन का असली हीरो कोई इंसान नहीं बल्कि एक छोटी सी डिवाइस थी जो लगातार दुश्मन की नजरों से बचते हुए पायलट की लोकेशन भेजती रही। पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ जब अमेरिकी वायुसेना एक फाइटर जेट ईरान के भीतर मार गिराया। पायलट ने तुरंत इजेक्ट किया और अपनी जान बचाने के लिए पहाड़ी इलाकों की तरह भाग गया। बताया जाता है कि वो करीब 7000 फीट की ऊंचाई तक पहाड़ चढ़ गया और एक सककरी दरार में छिप कर बैठ गया। जहां से उसे ढूंढ पाना लगभग नामुमकिन था। लेकिन यहीं से शुरू हुआ हाईटेक रेस्क्यू मिशन।

इस ऑपरेशन का सबसे अहम हिस्सा था एक छोटा डिवाइस। सीएसईएल डिवाइस लगभग 800 ग्राम वजनी। डिवाइस पायलट के साथ ही बंधा रहता है और जैसे ही पायलट इजेक्ट करता है, यह तुरंत एक्टिव हो जाता है। यह सेटेलाइट से जुड़कर इंक्रिप्टेड सिग्नल के जरिए लगातार लोकेशन और जरूरी जानकारी भेजता रहता है। इसकी खासियत क्या है? यह फ्रीक्वेंसी हाइपिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है। दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इसे आसानी से ट्रैक नहीं कर सकते। 10 मीटर गहरे पानी में भी यह काम करता है और इसकी बैटरी 21 दिन तक चल सकती है। यानी हर हाल में यह पायलट का लाइफ लाइन बनकर रहता है। इस डिवाइस की मदद से अमेरिकी सेना को यह पता चला कि पायलट एक पहाड़ी दरार में छुपा हुआ है। इसके बाद शुरू हुआ 48 घंटे का हाई रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन। आसमान में अमेरिकी फाइटर जेट्स लगातार गश्त करते रहे ताकि ईरानी सेना उस इलाके के करीब ना पहुंच सके। क्योंकि रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी सेना भी उस पायलट की तलाश में थे और उस पर इनाम तक घोषित कर दिया गया था। लेकिन हर कुछ घंटों में आने वाले इंक्रिप्टेड मैसेज ने अमेरिकी सेना को पायलट तक पहुंचा दिया और आखिरकार दो दिन बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

इस पूरे मिशन पर डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे अमेरिकी सेना की साहस और काबिलियत का अद्भुत प्रदर्शन बताया है। यह रेस्क्यू मिशन सिर्फ एक पायलट को बचाने की कहानी नहीं है। यह दिखाता है कि आधुनिक युग में अब सिर्फ हथियारों से ही नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी से भी जंग लड़ा जा रहा है। जहां एक छोटी सी डिवाइस जिंदगी और मौत के बीच का फर्क तय कर सकती है। एक तरफ पहाड़ में छिपा पायलट, दूसरी तरफ दुश्मन की सेना और बीच में सेटेलाइट, सिग्नल और हाईटेक सिस्टम। यही है आज की वॉरफेयर की नई हकीकत।  इस मिशन ने यह भी साबित कर दिया कि अगर टेक्नोलॉजी अगर टेक्नोलॉजी और रणनीति साथ हो तो सबसे खतरनाक हालत में भी उम्मीद जिंदा रहती है।

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