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दुशांबे ग्लेशियर सम्मेलनः भारत ने जलवायु कार्रवाई के प्रति जताई प्रतिबद्धता

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

दुशांबे। विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने शुक्रवार को ताजिकिस्तान के दुशांबे में आयोजित ग्लेशियरों के संरक्षण पर उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस दौरान भारत ने जलवायु कार्रवाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

सम्मेलन में सिंह ने कहा कि भारत का क्रायोस्फीयर अनुसंधान, ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) जोखिम मानचित्रण और अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) जैसी क्षेत्रीय साझेदारियां समाधान को आगे बढ़ा रही हैं।

उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक जलवायु कार्रवाई का नेतृत्व कर रहा है। हम महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) और दीर्घकालिक निम्न-कार्बन विकास रणनीति (एलटी-एलईडीसी) के साथ यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौते के लक्ष्यों पर दृढ़ हैं। हम अक्षय और पवन ऊर्जा में वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर, सौर ऊर्जा में 5वें स्थान पर हैं। मार्च 2025 तक 48% गैर-जीवाश्म ऊर्जा के साथ हमने जीडीपी उत्सर्जन तीव्रता में 36% (2005-20) की कटौती की है।

विदेश राज्य मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा दुशांबे में ग्लेशियरों के संरक्षण पर उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य मिला। हिमालय के ग्लेशियरों की सुरक्षा जल, खाद्य सुरक्षा और अरबों लोगों के जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। भारत विज्ञान और कार्रवाई के माध्यम से हिमालय की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा संयुक्त राष्ट्र के 2025 अंतरराष्ट्रीय ग्लेशियर संरक्षण वर्ष और क्रायोस्फेरिक विज्ञान के दशक (2025-34) को वैश्विक प्रयासों को एकजुट करना चाहिए। हमें संवेदनशील क्षेत्रों के लिए संसाधन जुटाने तथा पूर्व चेतावनी प्रणालियों और टिकाऊ जल प्रबंधन जैसे समाधानों को बढ़ाने की जरूरत है।

सिंह 29 मई से 6 जून तक ताजिकिस्तान और किर्गिज गणराज्य के दौरे पर हैं। वह दुशांबे में सम्मेलन से इतर ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे और भारतीय समुदाय के लोगों से भी मिलेंगे। इसके बाद राज्य मंत्री किर्गिज गणराज्य के लिए प्रस्थान करेंगे और वहां शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे।

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