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110 डाइलिसिस यूनिट, 240बेड सुविधाओ से लेस, लखनऊ का पीजीआई होगा देश में गुर्दा प्रत्यारोपण का सबसे बड़ा केंद्र

LUCKNOW: लखनऊ मे नम्बर एक की श्रेणी में शामिल (PGI)संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ का ही नहीं देश का सबसे बड़ा गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र बनने जा रहा है। यहां 340 बेड पर किडनी मरीजों को भर्ती करने और उनके प्रत्यारोपण एवं डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध होगी। नवंबर से शुरू होगा प्रत्यारोपण : गुर्दा प्रत्यारोपण भवन में नवंबर से मरीजों को भर्ती करने, डायलिसिस करने और प्रत्यारोपण की सुविधाएं शुरू कर दी जाएंगी। इस केंद्र पर 500 से अधिक डाक्टर व स्टाफ की टीम तैनात होगी। नेफ्रो के विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद ने बताया कि इमरजेंसी मेडिसिन, ट्रांसप्लांट सर्जरी और नेफ्रो सर्जरी तीनों विभाग अब एक ही भवन में आ जाएंगे। संस्थान में गुर्दा रोगों से जुड़ी सभी तरह की जांच सुविधाएं भी मौजूद होंगी। आपरेशन अत्याधुनिक तरीके से किए जाएंगे।

‘प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सेंटर प्रारंभ होने से उत्तर प्रदेश के साथ ही आसपास के राज्यों के किडनी मरीजों को इलाज एवं डायलिसिस की उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। -योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री।

‘340 बेड का गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह सिर्फ यूपी का ही नहीं, बल्कि देश का सबसे बड़ा गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र होगा।अभी तक पूरे देश में इतनी अधिक बेड संख्या वाला गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र कहीं भी नहीं है। संस्थान में इसके लिए नया भवन बनकर तैयार हो गया है और अब यहां पर सभी जरूरी यूनिटें और मशीनें लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है। डाक्टरों ने नवंबर से यहां पर गुर्दा मरीजों को भर्ती करने और प्रत्यारोपण की तैयारी भी शुरू कर दी है। इस केंद्र के शुरू होने का फायदा उप्र के अतिरिक्त बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश इत्यादि राज्यों से आने वाले किडनी रोगियों को भी मिलेगा।

संस्थान में 110 डायलिसिस यूनिटें लगाई जाएंगी। इससे गंभीर रोगियों को डायलिसिस कराना भी आसान होगा। अभी मरीजों को इसके लिए अस्पताल दर अस्पताल भटकना पड़ता है। निजी अस्पतालों में डायलिसिस कई गुना महंगी होती है। यहां अधिक लोगों को कम खर्च में प्रत्यारोपण का लाभ मिलेगा। पीजीआइ में प्रत्यारोपण का खर्च तीन से चार लाख रुपये आता है जबकि बाहर निजी अस्पतालों में तीन गुना से अधिक पैसे लगते हैं। डाक्टरों के अनुसार यहां गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए करीब 50 वेंटिलेटर की भी सुविधा होगी।

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