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अंतर्राष्ट्रीय

अमीर देशों के नेताओं ने गरीब देशों को कोविड-19 टीके की एक अरब से ज्यादा डोज मुहैया कराने का लिया संकल्प

प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि देशों को सीधे तौर पर और अंतरराष्ट्रीय कोवैक्स पहल, दोनों तरीके से टीकों की आपूर्ति की जाएगी.

कार्बिस बे। दुनियाभर के अमीर देशों के नेताओं ने गरीब देशों को कोविड-19 रोधी टीके (Corona Vaccine) की एक अरब से ज्यादा खुराकें मुहैया कराने का संकल्प लिया है. इसके साथ ही उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनियों पर ग्लोबल मिनिमम टैक्स (Global Minimum Tax) का समर्थन किया. उन्होंने सहमति जताई कि वे चीन (China) की बाजार विरोधी आर्थिक नीतियों से मुकाबला के लिए साथ मिलकर काम करेंगे. साथ ही बीजिंग से शिनजियांग और हांग-कांग में मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए कहेंगे.

दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में रविवार को जी-7 के शिखर सम्मेलन (G-7 Summit) के समापन पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Jonson) ने कहा कि देशों को सीधे तौर पर और अंतरराष्ट्रीय कोवैक्स (Covax) पहल, दोनों तरीके से टीकों की आपूर्ति की जाएगी. इस कमिटमेंट के बावजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि दुनिया की कम से कम 70 प्रतिशत आबादी के टीकाकरण और महामारी को समाप्त करने के लिए और 11 अरब और खुराकों की जरूरत है.

विभिन्न देशों के वित्त मंत्रियों द्वारा टैक्स से बचने का प्रयास कर रही मल्टीनेशल कंपनियों पर कम से कम 15 प्रतिशत वैश्विक कर लगाने को लेकर चर्चा के बाद न्यूनतम कॉरपोरेट टैक्स को लेकर भी जी-7 में व्यापक विचार-विमर्श हुआ. अमेरिका ने न्यूनतम टैक् की पैरवी की और राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) का मानना है कि एक साथ काम करते हुए यह सम्मेलन ज्यादा उचित वैश्विक अर्थव्यवस्था का समर्थन कर सकता है. समूह ने एक बयान में बताया कि , ‘चीन के संबंध में और प्रतिस्पर्धा के लिए हम वैश्विक अर्थव्यवस्था के निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था को कमजोर करने वाली बाजार विरोधी नीतियों और प्रथाओं को चुनौती देने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण पर परामर्श करना जारी रखेंगे.’

नेताओं ने कहा कि वे चीन से शिनजियांग और हांग-कांग में मानवाधिकारों और मौलिक आजादी का सम्मान करने के लिए कहेंगे. चीन पर आरोप है कि शिनजियांग में अल्पसंख्यक उईगुर के अधिकारों का वह हनन कर रहा है. सम्मेलन की मेजबानी करने वाले जॉनसन ने कहा कि दुनिया के बाकी हिस्सों में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के मूल्य को प्रदर्शित करने और दुनिया के गरीब देशों को टिकाऊ विकास के लिए जी-7 नेताओं के बीच ‘शानदार सद्भाव’ है. जी-7 के देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, अमेरिका और ब्रिटेन हैं.

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