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क़र्ज़ के दलदल में फंसा पाकिस्तान,चीन ने खोला शर्तों का पिटारा |

बीजिंग/इस्लामाबाद, : चीन और पाकिस्तान के बीच तथाकथिक दोस्ती का फ़र्दा फाश हो गया है पाकिस्तान जो हर समय चीन के गुरगण करता था अब उसपे लगाम लग गई है ,जहाँ पाक और चीन ‘हर मौसम के साथी’ का नारा ध्वस्त होता हुआ दिखाई दे रहा है और अब पाकिस्तान चीन का असली चेहरा देख रहा है। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि, पिछले कुछ महीनों से पर्दे के पीछे चीन लगातार पाकिस्तान को अपमानित कर रहा है और पाकिस्तान के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, सीपीईसी प्रोजेक्ट की वजह से पाकिस्तान अब गर्दन तक चीन के कर्ज में डूब चुका है और अब इस देश को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता है।
चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर और चाइना मोबाइल पाकिस्तान (सीएमपीएके) से संबंधित दूरसंचार टॉवर सहित बीजिंग के हाथों इस्लामाबाद को अपमानित किए जाने के कई उदाहरण सामने आए हैं। पाकिस्तान और चीन के बीच ‘पहाड़ों से भी ऊंचे’, ‘महासागर से भी गहरे’ में रिश्ते में दरारें आ गई हैं, हालांकि दोनों देशों ने अपनी दोस्ती को अभूतपूर्व बताया था, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और हो चुकी है और दोनों देशों के संबंध के कथित मजबूत दीवार दरकने लगी है।
जब चीन और पाकिस्तान के बीच सीपीईसी प्रोजेक्ट को लेकर समझौता किया गया था, उस वक्त विश्व के कई देशों ने पाकिस्तान को प्रोजेक्ट को लेकर आगाह किया था, लेकिन पाकिस्तान से सभी की चेतावनी को दरकिनार करते हुए चीन के साथ प्रोजेक्ट साइन किया था। पाकिस्तानी नेताओं ने देश की आवाम से काफी बड़ी बड़ी बातें कहीं थी और कई बड़े सपने दिखाए थे। पाकिस्तानी नेताओं ने कहा था कि, प्रोजेक्ट फाइनल होने के बाद हर पाकिस्तानी लखपति होगा और पाकिस्तान की तरक्की पूरी दुनिया में सबसे आगे हो जाएगी, लेकिन अब पाकिस्तान को असलियत का सामना करना पड़ रहा है, जब 62 अरब डॉलर का ये प्रोजेक्ट पाकिस्तान को पूरी तरह से बर्बाद करने के करीब पहुंच चुका है।

सीपीईसी प्रोजेक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से ग्वादर बंदरगाह तक 62 अरब डॉलर की लागत से कॉरिडोर का निर्माण होना था, जिसको लेकर पाकिस्तान के लोगों ने जमकर जश्न मनाया था, लेकिन पाकिस्तान के नेताओं और बड़े सैन्य अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट में जमकर भ्रष्टाचार किए। इस प्रोजेक्ट के जरिए करोड़ों कमाकर पाकिस्तान के कई बड़े सैन्य अधिकारी पाकिस्तान छोड़कर अमेरिका और यूरोप चले गये और देश कर्ज के दलदल में डूबता चला गया। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की भारी कमी है और रही सही कसर चीन के ‘छुपे हुए शर्तों’ ने पूरा कर दिया है। टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की रफ्तार अब करीब करीब बंद हो चुकी है और इस प्रोजेक्ट में अब पाकिस्तान के मजदूर नाममात्र के ही हैं।

एक तरफ पाकिस्तान कर्ज के दलदल में फंस रहा है तो चीन छुपे हुए शर्तों का पिटारा खोलता जा रहा है। 14 जुलाई को पाकिस्तान में चीनी इंजीनियरों की बस पर हमला हुआ था, जिसमें चीन के 9 इंजीनियर मारे गये थे, जिसको लेकर चीन ने पाकिस्तान के अंदर अपनी जांच टीम भेजी थी और अब चीन ने पाकिस्तान ने 3 करोड़ 80 लाख डॉलर का मुआवजा मांगा है और मुआवजा नहीं देने तक चीन ने दासू डैम का प्रोजेक्ट बंद कर दिया है, जो पाकिस्तान के लिए अपमान और आर्थिक आघात, दोनों तरह की बात है। , चाइना कैपिटल मोबाइल पाकिस्तान से संबंधित एक दूरसंचार टावर को विस्फोटकों द्वारा अशांत उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र में नष्ट कर दिया गया था। पाकिस्तान स्थित मोबाइल डेटा नेटवर्क ऑपरेटर जोंग के नाम से कारोबार करता है और इसको लेकर चीन ने पाकिस्तान पर काफी ज्यादा जबाव बढ़ा दिया है।

 

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