Breaking
INDIA गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की मतपत्र से चुनाव कराने की मांगCJP के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने इजाजत नहीं दी, BNSS की धारा 163 लागूराहुल गाँधी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू का 14 अगस्त 1947 में दिया ऐतिहासिक भाषण पढ़ाज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी होनी चाहिए- ममताइंडिया गठबंधन के सांसदों का विजय चौक पर प्रदर्शनCJP प्रोटेस्ट- सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा हथौड़ी से मक्खी ना मारें?नेता विपक्ष राहुल गाँधी के साथ राष्ट्रपति से मिलने जा रहे हैं विपक्ष के 10 सांसद,अभिनेता नाना पाटेकर का निधन, 75 वर्ष की उम्र में देर रात आया कार्डियक अरेस्टमुख्य चुनाव आयुक्त विरोध प्रदर्शन: राहुल गाँधी हिरासत में, सड़क पर लेटीं प्रियंकाप्रधानमंत्री मोदी ने कहा We Will Do it , राहुल ने कहा its done bro
उत्तर प्रदेश

सभी समाचार पत्रों को समानता से मिले विज्ञापन : शेखर पंडित

आज का सबसे चिंतनीय प्रश्न यही है की समाचार पत्रों के अस्तित्व को कैसे बचाया जाए? छोटे मझोले समाचार पत्र विज्ञापनों पर ही निर्भर रहते हैं। उत्तर प्रदेश में बहुत से समाचार पत्रों को विज्ञापन ना देकर ऐसा प्रतीत होता है कि, इनके अस्तित्व को समाप्त करने की सोची समझी रणनीति के तहत कुचक्र चलाया जा रहा है।

लखनऊ। ऑल इंडिया न्यूज़ पेपर एसोसिएशन के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष शेखर पंडित ने प्रदेश की सभी इकाई को भंग करते हुए नई कमेटी बनाने की घोषणा की, समाचार के मुद्दों पर वार्ता करते हुए उन्होंने कहा की सूचना विभाग द्वारा दिए जाने वाले सजावटी विज्ञापन विशेष समाचार पत्रों को ही दिए जाते हैं।

जो कि मानक के विपरीत हैं। यह विज्ञापन समानता के आधार पर सभी समाचार पत्रों को दिया जाना चाहिए। चुनिंदा समाचार पत्रों को ही विज्ञापन दिया जाना माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय 13 मई 2015 के आदेशों की अवमानना है। आईना इस त्रुटिपूर्ण विज्ञापन नियमावली को सूचना विभाग से संशोधित कर दूर कराने के लिए वचनबद्ध है। समाचार पत्रों की दयनीय स्थिति करोना काल में और भी भयावह हो गई है, इस संकट काल में कई अखबार बंद हो चुके हैं या फिर बंद होने की कगार पर हैं। यह चिंता का विषय है कि अनेक वर्षों के अनुभवों वाले समाचार पत्रों के कर्मचारी बजट कम होने से सड़क पर आ गए हैं।

आज का सबसे चिंतनीय प्रश्न यही है की समाचार पत्रों के अस्तित्व को कैसे बचाया जाए। हमारे सामने यह महत्वपूर्ण विषय है कि, छोटे मझोले समाचार पत्र विज्ञापनों पर ही निर्भर रहते हैं। उत्तर प्रदेश में बहुत से समाचार पत्रों को विज्ञापन ना देकर ऐसा प्रतीत होता है कि, इनके अस्तित्व को समाप्त करने का सोची समझी रणनीति के तहत कुचक्र चलाया जा रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने समाचार पत्रों को दिए जाने वाले बजट में कोई कटौती नहीं की है। मुख्यमंत्री स्वयं मीडिया जगत के लिए सराहनीय कार्य कर रहे हैं। यह विदित है की मीडिया जगत के लोग भली-भांति इस बात को जानते हैं। फिर भी समाचार पत्रों के अस्तित्व को मिटाने का षड्यंत्र किसके द्वारा रचा जा रहा है यह एक गंभीर जांच का विषय है।

शेखर पंडित ने कहा बहुत जल्दी ही पूरे प्रदेश में संगठन को मजबूत करते हुए इस विषय पर समाचार पत्रों के संपादकों पत्रकारों और समाचार पत्र से जुड़े हुए कर्मचारियों से गहनता से विचार विमर्श करते हुए निर्णय लिया जाएगा।

Related Articles

Back to top button