Breaking
Rahul Gandhi के धरने पर Ravi Shankar Prasad ने कहा – यह अराजकता की राजनीति हैक्या इस देश में FIR की मांग करना क्या अनार्की है- कांग्रेसराहुल का ये धरना सस्ती लोकप्रियता के लिए है- नड्डाराहुल गाँधी के धरने को लेकर जेपी नड्डा की प्रेस- बोले ये राहुल की हताशा और हठयोग है, ये धरना छात्रों के लिए नहीं है.Delhi Police संसद मार्ग कार्यालय पर Rahul Gandhi का धरना ,बोले,FIR होगी तभी हटेंगे बीजेपी ने कहा राहुल अराजकता फैला रहे हैंसावन सोमवार पर CM योगी ने गोरखनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक कियाMEA Press Briefing : FCRA पर अमेरिकी टिप्पणी को भारत ने किया खारिज, बोला ‘हमारी संसद ही लेगी फैसला’Rahul Gandhi का बड़ा आरोप: Delimitation से BJP छीनना चाहती है Tamil Nadu की ताकतApple ला रहा फोल्डेबल फ़ोन, 7.8-इंच स्क्रीन और A20 Pro चिपसेट वाला Iphone Ultraयुवाओं के नाम लिखा पत्र लिख धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
उत्तर प्रदेश

सभी समाचार पत्रों को समानता से मिले विज्ञापन : शेखर पंडित

आज का सबसे चिंतनीय प्रश्न यही है की समाचार पत्रों के अस्तित्व को कैसे बचाया जाए? छोटे मझोले समाचार पत्र विज्ञापनों पर ही निर्भर रहते हैं। उत्तर प्रदेश में बहुत से समाचार पत्रों को विज्ञापन ना देकर ऐसा प्रतीत होता है कि, इनके अस्तित्व को समाप्त करने की सोची समझी रणनीति के तहत कुचक्र चलाया जा रहा है।

लखनऊ। ऑल इंडिया न्यूज़ पेपर एसोसिएशन के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष शेखर पंडित ने प्रदेश की सभी इकाई को भंग करते हुए नई कमेटी बनाने की घोषणा की, समाचार के मुद्दों पर वार्ता करते हुए उन्होंने कहा की सूचना विभाग द्वारा दिए जाने वाले सजावटी विज्ञापन विशेष समाचार पत्रों को ही दिए जाते हैं।

जो कि मानक के विपरीत हैं। यह विज्ञापन समानता के आधार पर सभी समाचार पत्रों को दिया जाना चाहिए। चुनिंदा समाचार पत्रों को ही विज्ञापन दिया जाना माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय 13 मई 2015 के आदेशों की अवमानना है। आईना इस त्रुटिपूर्ण विज्ञापन नियमावली को सूचना विभाग से संशोधित कर दूर कराने के लिए वचनबद्ध है। समाचार पत्रों की दयनीय स्थिति करोना काल में और भी भयावह हो गई है, इस संकट काल में कई अखबार बंद हो चुके हैं या फिर बंद होने की कगार पर हैं। यह चिंता का विषय है कि अनेक वर्षों के अनुभवों वाले समाचार पत्रों के कर्मचारी बजट कम होने से सड़क पर आ गए हैं।

आज का सबसे चिंतनीय प्रश्न यही है की समाचार पत्रों के अस्तित्व को कैसे बचाया जाए। हमारे सामने यह महत्वपूर्ण विषय है कि, छोटे मझोले समाचार पत्र विज्ञापनों पर ही निर्भर रहते हैं। उत्तर प्रदेश में बहुत से समाचार पत्रों को विज्ञापन ना देकर ऐसा प्रतीत होता है कि, इनके अस्तित्व को समाप्त करने का सोची समझी रणनीति के तहत कुचक्र चलाया जा रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने समाचार पत्रों को दिए जाने वाले बजट में कोई कटौती नहीं की है। मुख्यमंत्री स्वयं मीडिया जगत के लिए सराहनीय कार्य कर रहे हैं। यह विदित है की मीडिया जगत के लोग भली-भांति इस बात को जानते हैं। फिर भी समाचार पत्रों के अस्तित्व को मिटाने का षड्यंत्र किसके द्वारा रचा जा रहा है यह एक गंभीर जांच का विषय है।

शेखर पंडित ने कहा बहुत जल्दी ही पूरे प्रदेश में संगठन को मजबूत करते हुए इस विषय पर समाचार पत्रों के संपादकों पत्रकारों और समाचार पत्र से जुड़े हुए कर्मचारियों से गहनता से विचार विमर्श करते हुए निर्णय लिया जाएगा।

Related Articles

Back to top button