रक्षा को लेकर भारत-कनाडा में बढ़ेगा सहयोग, क्या रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में रहेगा अहम?

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।
नई दिल्ली। भारत और कनाडा ने राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून प्रवर्तन और साइबर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए एक साझा कार्य योजना पर सहमति जताई है. यह कदम दोनों देशों के बीच 2023 में एक खालिस्तानी अलगाववादी की हत्या को लेकर पैदा हुए राजनयिक विवाद के बाद रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की और भविष्य के सहयोग के लिए एक साझा रोडमैप पर सहमति बनाई. इसके तहत भारत और कनाडा ड्रग तस्करी, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और साइबर अपराध जैसे मुद्दों से निपटने के लिए सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति करेंगे.
बयान के अनुसार, यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संचार को सुव्यवस्थित करने में मदद करेगी और समय पर खुफिया जानकारी साझा करने को संभव बनाएगी. खास तौर पर अवैध ड्रग्स के प्रवाह, विशेष रूप से फेंटेनाइल और उसके प्रीकर्सर रसायनों की तस्करी, को लेकर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है. इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क की गतिविधियों पर संयुक्त रूप से नजर रखने और कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी है.
भारत और कनाडा ने साइबर सुरक्षा नीति पर सहयोग को औपचारिक रूप देने और साइबर खतरों से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान को मजबूत करने का भी फैसला किया है. दोनों देश धोखाधड़ी, अवैध आव्रजन और उससे जुड़े अपराधों पर घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप सहयोग जारी रखने पर भी सहमत हुए हैं.
बता दें, भारत-कनाडा संबंध सितंबर 2023 में उस समय बिगड़ गए थे, जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि भारतीय सरकारी एजेंट खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल थे. भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बेतुका और बिना सबूत करार दिया था.
इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया गया और कनाडा में खालिस्तानी तत्वों व आपराधिक गिरोहों की गतिविधियों को लेकर तीखे आरोप-प्रत्यारोप हुए. हालांकि, 2024 के अंत में दोनों पक्षों ने सुरक्षा संबंधों को धीरे-धीरे बहाल करने की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें खुफिया एजेंसियों और कानून प्रवर्तन संस्थाओं के बीच शांत लेकिन निरंतर संपर्क शामिल रहा. मार्क कार्नी के कनाडा के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद द्विपक्षीय रिश्तों को दोबारा मजबूत करने के प्रयासों में तेजी आई. सुरक्षा एजेंसियों के बीच बातचीत और उच्चस्तरीय संपर्क इसी दिशा में उठाए गए कदम माने जा रहे हैं.





