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उत्तराखंड

विशेष मशीने न मिल पाने के कारण पोक्कली धान की खेती पर गहरा असर।

नई दिल्ली : कृषि करना इतना आसान नही है किसानों को रोज़ाना एक नई मुसीबत का सामना करना पड़ता है वैसे भी हर दिन उभरते नये तकनीक और नयी पीढ़ी का खेती से रूबरू होना कई जगहों पर पांरपरिक फसलों की खेती को नुकसान पहुंचा रहा है. क्योंकि इसमें हाथों से अधिक काम लिया जाता है, ना कि मशीन का इस्तेमाल किया जाता है.ऐसी की समस्या कोच्ची के कदमक्कुडी में सामने आ रही है, यहां किसान खेती के लिए मजदूरों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं. कटाई के लिए हाथों की कमी कदमक्कुडी में पोक्कली चावल किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में सामने आई है. यहां पर इस वर्ष संभावित 100 हेक्टेयर में से लगभग 85 हेक्टेयर में पोक्कली चावल खेती की जा रही है. पोक्कली धान की कटाई सात से 10 दिनों के अंदर करनी होती है. इतने कम समय में इस बड़े क्षेत्रफल में धान की कटाई के लिए 200-300 श्रमिक भी कम पड़ जाते हैं.
कोच्ची की जिला कृषि अधिकारी मैरी शिल्पा ने द हिंदू को बताया कि नई पीढ़ी के खेती से दूर रहने के कारण, कटाई के लिए पर्याप्त मजदूर मिलना एक संघर्ष बना हुआ है. चूंकि कटाई पानी में लगभग कमर तक खड़े होकर की जानी है, इसलिए श्रमिकों को दोपहर के बाद से काम पर नहीं लगाया जा सकता है. इस लिए कटाई के पूरा होने में और देरी हो सकती है. पोकली की खेती के लिए पारंपरिक कटाई मशीन का भी बहुत कम उपयोग होता है. हालांकि कुछ साल पहले प्रदर्शित की गई एक विशेष रूप से डिजाइन की गई मशीन कुछ हद तक सफल पाई गई थी, लेकिन यह उससे आगे नहीं बढ़ी।
कदमक्कुडी नेल्लुलप्पाधाका पदशेखर समिति के सचिव केए थॉमस ने कहा कि सरकार ने पोकली खेती के लिए अनुकूल मशीन विकसित करने में बहुत कम दिलचस्पी दिखाई है, जो मजदूरों की कमी को कुछ हद तक हल कर सकती है. सरकार को पोक्कली खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष बजटीय प्रावधान भी फिर से शुरू करना चाहिए, जैसा कि 90 के दशक के अंत में प्रचलन में था, इससे पहले कि ऑडिट आपत्तियों के बाद इसे अचानक निलंबित कर दिया गया था. सरकार ने उस समय प्रति हेक्टेयर पोक्कली धान की कटाई के लिए 20 श्रमिकों के लिए 400 रुपए की सहायता की पेशकश की थी, जो धान के खेत मालिकों द्वारा भुगतान की जाने वाली दैनिक मजदूरी के अतिरिक्त थी.
इसलिए अक्सर यह मांग उठती है कि कटाई अवधि के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) को समवर्ती रूप से नहीं चलाने या तुलनात्मक रूप से कम श्रम प्रधान कार्यक्रम में मजदूरों के नुकसान की चुनौती को हल करने के लिए कटाई कार्य को कार्यक्रम के तहत लाने की भी मांग है. इस बारे में जानकारी देते हुए जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि श्रम की कमी को दूर करने के लिए मनरेगा के तहत कटाई के काम की अनुमति देने के लिए पहले ही आवेदन कर दिया है.
पोक्कली खेत के मालिक बेनी जेवियर ने कहा कि अगर एक तय समय के अंदर कटाई नहीं की जाती है तो पोक्कली के डंठल बेमौसम बारिश के कारण मर सकते हैं, जिससे काफी नुकसान हो सकता है. उन्होने कहा कि जर्मनी से आयातित एक कटाई मशीन का कुछ साल पहले प्रदर्शन किया गया था, लेकिन इसकी लागत अधिक होने के कारण यह मशीन सफल नहीं हो पायी. इसके प्रस्तावक अब लागत कम करने के लिए अनुकूलन पर काम कर रहे हैं. यदि यह सफल साबित होता है, तो यह दो सौ श्रमिकों द्वारा लिए गए लगभग 20 दिनों की काम की तुलना में तीन या चार दिनों के भीतर कटाई खत्म करने में मशीन मदद कर सकता है.

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