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मुख्यमंत्री स्टालिन ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, वक्फ विधेयक को वापस लेने की मांग

अर्ली न्यूज़ नेटवर्क।

नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बुधवार (2 अप्रैल) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को वापस लेने की मांग की। स्टालिन ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने-अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और इस अधिकार को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना निर्वाचित सरकारों का कर्तव्य है। हालांकि, वक्फ अधिनियम, 1995 में प्रस्तावित संशोधनों में अल्पसंख्यकों को दिए गए संवैधानिक संरक्षण को ध्यान में नहीं रखा गया है और “मुस्लिम समुदाय के हितों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए बाध्य हैं। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की और रेखांकित किया कि तमिलनाडु विधानसभा ने कुछ दिन पहले केंद्र से विधेयक वापस लेने का आग्रह करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था।

मौजूदा वक्फ अधिनियम के प्रावधान समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और वे वक्फ की संपत्तियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण में वक्फ बोर्डों की शक्तियों और जिम्मेदारियों को कमजोर कर देंगे। मौजूदा अधिनियम में विभिन्न धाराओं में प्रस्तावित बड़े पैमाने पर संशोधन अधिनियम की मूल भावना को कमजोर कर देंगे। उदाहरण के लिए, राज्य वक्फ बोर्डों में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को अनिवार्य रूप से शामिल करने का प्रस्ताव मुस्लिम समुदाय की अपनी धार्मिक और धर्मार्थ निधियों को स्वतंत्र रूप से प्रबंधित करने की क्षमता की धार्मिक स्वायत्तता को कमजोर करेगा। ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ प्रावधान को हटाने से कई ऐतिहासिक वक्फ संपत्तियों की स्थिति को खतरा है।

यह शर्त कि कम से कम पाँच साल तक इस्लाम का पालन करने वाले व्यक्ति ही वक्फ को संपत्ति दान कर सकते हैं, गैर-मुसलमानों को वक्फ को संपत्ति दान करने से रोकेगी जो देश की समन्वयकारी संस्कृति में बाधा उत्पन्न करेगी। चूँकि मौजूदा वक्फ अधिनियम, 1995 पर्याप्त है और इसमें वक्फ के हितों और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं, इसलिए हमारा मानना ​​है कि मौजूदा वक्फ अधिनियम, 1995 में ऐसे दूरगामी संशोधनों की कोई आवश्यकता नहीं है।

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